चेक कितने प्रकार के होते हैं (Types of Cheque in Hindi) | चेक भरने का सही तरीका क्या है

चेक (Types of Cheque) कितने प्रकार के होते हैं

चेक कई प्रकार के होते हैं। उन्हें अलग-अलग तरह से यूज किया जाता है। यह अकाउंट होल्डर्स पर निर्भर है कि वे किस तरह के चेक की डिमांड करते हैं। जिस तरह अलग-अलग प्रकार के चेक होते हैं, उसी तरह चेकों को अलग-अलग तरह से भरा भी जाता है। इस आर्टिकल में चेक के प्रकार (Types of Cheque) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। चेक को भरने का तरीका भी बताया जाएगा। इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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चेक (Cheque) तीन प्रकार के होते हैं

चेक मुख्य तौर पर तीन प्रकार के होते हैं। इसमें ऑर्डर चेक, बेयरर चेक और ओपन चेक शामिल हैं। इन चेकों को स्थानीय चेक, आउटस्टेशन चेक, एटपार चेक, उपहार चेक, ऊंचे मूल्य वाले चेक, साधारण मूल्य वाले चेक, सेल्फ आदि चेकों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। क्रास्ड यानी कैंसल चेक भी होता है, जिसके जरिए किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकता है। यह कंपनी या बैंकों द्वारा अलग-अलग कामों के लिए मांगा जाता है। पीएफ से पैसे निकालने के लिए भी कैंसल चेक की जरूरत पड़ती है।

बेयरर चेक क्या होता है

बेयरर चेक को अकाउंट होल्डर के प्रतिनिधि इस्तेमाल कर सकते हैं। खाताधारक चेक पर अमाउंट लिख देते हैं। आगे की तरफ हस्ताक्षर कर प्रतिनिधि को दे देते हैं। प्रतिनिधि इसके बाद बैंक में जाकर चेक को सीधे कैश करा सकते हैं। अकाउंट होल्डर को चेक के पीछे की तरफ साइन करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तरह बेयरर चेक किसी को भी दिया जा सकता है। इसका मकसद ट्रांजैक्शन में आसानी पैदा करना है। लोगों को चेक के जरिए पैसे देने के लिए बेयरर चेक का इस्तेमाल किया जाता है।

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ओपन चेक क्या है

ओपन यानी खुला चेक का इस्तेमाल आमतौर पर खुद के लिए किया जाता है। अकाउंट होल्डर ओपन चेक को काउंटर पर दिखाकर ट्रांजैक्शन लिमिट के हिसाब से पैसे निकाल सकते हैं। इसकी और खास बात यह है कि ओपन चेक के पीछे की तरफ हस्ताक्षर कर दूसरे व्यक्ति को भी अथॉराइज्ड किया जा सकता है। इस चेक के जरिए पैसे को अकाउंट में ट्रांसफर भी किया जा सकता है। चूंकि अब कई ऐसे प्राइवेट बैंक हैं, जो विड्राल फार्म के जरिए पैसे जारी करने की बजाय ओपन चेक लाने के लिए कहते हैं, इसलिए इसकी वैल्यू बढ़ गई है।

आर्डर चेक किसे कहते है

आर्डर यानी आदेश चेक का इस्तेमाल भी पैसे निकालने और जमा करने के लिए किया जाता है। चेक के बैक साइड पर हस्ताक्षर कर दूसरे व्यक्ति को भी लेन-देन के लिए अथॉराइज्ड किया जा सकता है। यह एक तरह से ओपन चेक की तरह ही होता है। इसी तरह कैंसल चेक भी होता है। किसी भी चेक पर दो बड़ी लाइनें खीचने के बाद वह कैंसल हो जाता है। इस चेक को लेन-देन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इस तरह के चेक को आमतौर पर पीएफ से पैसे निकालने, लोन हासिल करने या फिर कंपनी की डिमांड पर इस्तेमाल किया जाता है।

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चेकों का वर्गीकरण

  • चेकों को वर्गीकृत भी किया गया है। इसमें मुख्य रूप से स्थानीय चेक, आउटस्टेशन चेक और एटपार चेक शामिल हैं।
  • स्थानीय चेक उसे कहते हैं, जो एक शहर में लेन-देन के लिए मान्य होते हैं। दूसरे शहर में इस चेक का इस्तेमाल करने पर अलग से चार्ज देना होता है।
  • आउटस्टेशन चेक भी होता है। इसके लिए नया चेक जारी नहीं किया जाता है। स्थानीय चेक को दूसरे शहर में इस्तेमाल करने पर यह आउटस्टेशन चेक हो जाता है।
  • एटपार चेक भी होता है। इस चेक को पूरे देश में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह संबंधित बैंक की किसी भी ब्रांच में स्वीकार्य कर लिया जाता है।

मूल्यों पर आधारिक चेक

चेकों को मूल्यों के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया है। आमतौर पर 1 लाख रुपये से कम मूल्य वाले चेक को नॉर्मल वैल्यू चेक कहते हैं। जबकि 1 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य वाले चेक को हाई वैल्यू चेक कहते हैं। इसी तरह उपहार चेक भी होता है, जिसे गिफ्ट चेक कहा जाता है। इसे प्रियजनों को दिया जाता है। इसके तहत चेक पर 100 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की राशि दर्ज की जा सकती है। कुलमिलाकर चेकों को वर्गीकृत करने की मंशा लोगों को लेन-देन में सुविधा पहुंचाना है।

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सेल्फ चेक क्या है

सेल्फ चेक उसे कहते हैं, जिसपर खाताधारक द्वारा सेल्फ लिखा जाता है। चेक पर चूंकि खाताधारक का नाम, अकाउंट नंबर पहले ही दर्ज होता है, इसलिए ऊपर के कॉलम में सेल्फ लिखने के बाद पैसों का भुगतान कर दिया जाता है। हालांकि सेल्फ लिखने के बाद भी खाताधारक को चेक पर साइन करना होता है। इसी तरह आगे की तारीख वाला चेक होता है, जिसपर एक तारीख लिख दी जाती है और अथॉराइज्ड व्यक्ति को इसी तारीख के अंदर लेन-देन करना होता है। इसी तरह पीछे की तारीख वाले चेक को अंतिम तिथि से तीन महीने पहले तक कैश कराया जा सकता है।

चेक भरने का सही तरीका

  • चेक भरने के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। चेक के जरिए लेन-देन के लिए कई चीजों को ध्यान में रखना जरूरी है।
  • चेक को एक तरह के पेन से ही भरना चाहिए। अलग-अलग कलर की सियाही वाले पेन द्वारा भरे गए चेक को कैंसल भी किया जा सकता है।
  • चेक भरने के लिए रेड पेन का इस्तेमाल कतई न करें। चेक पर पूरा नाम लिखें। डेट और अमाउंट लिखें। अमाउंट को शब्दों और अंकों, दोनों में लिखें।
  • मोबाइल नंबर लिखें। जिस हस्ताक्षर के साथ बैंक अकाउंट खोला गया है, चेक पर भी वही हस्ताक्षर करें। ओवर राइटिंग से बचें।
  • चेक पर किसी तरह की काट-पीट न हो। एक शब्द पर दूसरे शब्द चढ़े न हों। इस सूरत में चेक को कैंसल कर दिया जाता है।

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कैसे जारी होती है चेक बुक

अगर आपका किसी बैंक में खाता है तो आप चेक हासिल कर सकते हैं। संबंधित बैंक को इसके लिए एक एप्लीकेशन लिखकर देना होता है। चेक बुक कितनी पेज की चाहिए, इसका जिक्र भी किया जाता है। खाताधारक 50, 100 या इससे ज्यादा पेजों पर आधारिक चेक बुक हासिल कर सकते हैं। बैंक इसके लिए अलग से चार्ज करते हैं। यह चार्ज नॉर्मल होता है। यानी आमतौर पर 50 पेज की चेक बुक के लिए 250-300 रुपये तक चार्ज किए जाते हैं। अलग-अलग बैंकों के अलग-अलग चार्ज हैं।

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Munendra Singh

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