टैक्स सेविंग स्कीम क्या है | Tax Saving Scheme Explained in Hindi

टैक्स सेविंग स्कीम (Tax Saving Scheme) क्या है

सरकारी कर्मचारी हों या फिर प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोग, टैक्स से बचने के लिए हर तरह के जतन करते हैं। छोटे-बड़े कारोबारी भी टैक्स में छूट के लिए सीए के चक्कर काटते हैं। हालांकि भारत में ढेर सारी ऐसी स्कीमें हैं, जिनमें निवेश कर टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। इस आर्टिकल में टैक्स सेविंग स्कीम (Tax Saving Scheme) की उन स्कीमों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है, जिनके जरिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इससे जुड़े सभी जरूरी तकनीकी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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यहां निवेश कर के हासिल कर सकते हैं टैक्स में छूट

भारत में ढेर सारे ऐसे वित्तीय संस्थान हैं, जहां टैक्स बेनिफिट के लिए ढेर सारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इसमें सरकारी संस्थान भी शामिल हैं। राष्ट्रीय बैंक और डाकघरों में भी ढेर सारी ऐसी योजनाएं हैं, जहां निवेश कर टैक्स बेनिफिट हासिल किया जा सकता है। फिलहाल ईएलएसस फंड, एनपीएस, पीपीएफ, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, सुकन्या, यूलिप्स, पेंशन प्लान, इंश्योरेंस, बैंक एफडी, एनएससीएस आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहां निवेश कर टैक्स बेनिफिट के लिए क्लेम किया जा सकता है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंडमें निवेश के बाद टैक्स में छूट

पीपीएफ में निवेश के बाद मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है। छोटी स्कीम होने के की वजह से इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट की अपेक्षा ज्यादा फायदा है। इसी तरह सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम में निवेश करने पर भी टैक्स बेनिफिट के लिए क्लेम किया जा सकता है। इसमें ब्याज आय पर अतिरिक्त 50 हजार रुपये की छूट का प्रावधान है। यानी बुजुर्गों के लिए अब टैक्स छूट की सीमा बढ़कर साढ़े तीन लाख रुपये हो गई है। यही नहीं, 80 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्ग साढ़े पांच लाख रुपये तक पर टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं।

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सुकन्या समृद्धि योजना

डाकघर और बैंकों द्वारा संचालित सुकन्या समृद्धि योजना भी टैक्स में छूट के लिए बेहतर अवसर प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत निवेश पर करीब साढ़े बाठ फीसदी रेट के साथ ब्याज दिया जा रहा है। ब्याज की आय पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं है। इसी तरह यूलिप में भी निवेश कर टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। यह पूरी तरह टैक्स फ्री है। कैपिटल गेंस पर टैक्स के एलान से पहले भी म्यूचुअल फंडों की तुलना में यूलिप के साथ टैक्स का लाभ था।

एनपीएस के जरिए टैक्स में छूट

एनपीएस में रिटायरमेंट के समय निकाली जाने वाली 60 फीसदी रकम टैक्स फ्री होगी। अभी तक 40 फीसदी रकम पर ही टैक्स बेनिफिट का प्रावधान था। यानी इसके तहत अब 70 साल की उम्र तक निवेश को बनाए रखा जा सकता है। पेंशन प्लान हासिल करने के बाद भी टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। निवेश पर अतिरिक्त 50 हजार रुपये की टैक्स छूट मिलती है। इसी तरह एनएससी अपने ग्राहकों को 8 फीसदी रेट के साथ ब्याज दे रहा है। लोग बैंकों में एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए भी टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं। बैंक एफडी पर साढ़े सात से साढ़े आठ फीसदी दर के साथ ब्याज दे रहे हैं। अंतिम समय में टैक्स प्लानिंग करने वालों के लिए एफडी ज्यादा बेहतर विकल्प है।

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टैक्स में छूट पाने के लिए इंश्योरेंस भी बेहतर विकल्प है

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो अलग-अलग तरह के इंश्योरेंस कराकर टैक्स में छूट के लिए क्लेम करते हैं। ज्यादातर बीमा कंपनियां 20 साल के प्लान पर 5 फीसदी ब्याज दर के साथ भुगतान करती हैं, लेकिन इसका फायदा यह है कि इसके बड़े हिस्से पर टैक्स लागू नहीं होता है। इसी तरह इक्विटी फंडों में निवेश के जरिए भी टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। इस तरह वित्तीय संस्थानों द्वारा ढेर सारी ऐसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जहां निवेश कर टैक्स बेनिफिट हासिल किया जा सकता है। न सिर्फ टैक्स में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है, बल्कि निवेश पर ब्याज के साथ हैंडसम रिटर्न भी मिलता है, जिसकी वजह से लोगों को आर्थिक मदद भी मिल रही है।

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Munendra Singh

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