शेयर बाजार (Stock Market) क्या है | शेयर कैसे ख़रीदे – नियम की जानकारी

शेयर बाजार (Stock Market) क्या होता है

शेयर बाजार यानी एक ऐसा बाजार, जहां कंपनियों के शेयर को खरीदा और बेचा जाता है। कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए शेयर को बेचती हैं, जो निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का जरिया बन जाता है। हालांकि यह कंपनियों कि स्थिति पर निर्भर है। अगर बाजार में कंपनी के ब्रांड या प्रोडक्ट की वैल्यू है तो निवेशकों को इस कंडीशन में फायदा हासिल हो सकता है। जबकि ब्रांड की वैल्यू गिरने पर कंपनी के साथ उसके निवेशकों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। इस आर्टिकल में शेयर बाजार (Stock Market) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। शेयर को किस तरह खरीदा और बेचा जाता है, इसपर भी रोशनी डाली जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।

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भारत में दो शेयर मार्केट हैं

भारत में मुख्य रूप से दो शेयर बाजार हैं। बॉंबे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), भारत की ज्यादातर छोटी-बड़ी कंपनियां इन्हीं के तहत अपने शेयरों को बेचती हैं। बॉंबे स्टॉक एक्सचेंज में भारत की 30 बड़ी कंपनियों को रजिस्टर्ड किया गया है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 50 कंपनियां का रजिस्ट्रेशन हैं। ज्यादातर लोग इन्हीं 80 कंपनियों के शेयर को खरीदते और बेचते हैं। कंपनियों को बदला भी जाता है। यानी प्रदर्शन खराब होने पर कंपनियों को हटाकर दूसरी कंपनियों को रजिस्टर्ड किया जाता है, ताकि निवेशकों की रुचि शेयर बाजार में बनी रहे।

शेयर मार्केट में सामान नहीं खरीद सकते हैं

स्टॉक मार्केट एक ऐसा बाजार है, जहां सीधे तौर पर किसी भी तरह के सामान को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है। यहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। इसलिए इसे शेयर मार्केट कहते हैं। शेयरों को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया में दलाल शामिल होते हैं। दलाल के बिना आमतौर पर शेयर को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता है। मुंबई शेयर बाजार में लगभग 5500 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां रजिस्टर्ड हैं।

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शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश की शुरुआत कैसे करें

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो शेयर बाजार में पैसे लो लगाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसका तरीका मालूम नहीं है। इसकी वजह से कुछ लोग शेयर बाजार से दूर ही रहते हैं। हालांकि शेयर बाजार में पैसा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर कोई व्यक्ति बॉंबे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए कंपनियों के शेयर को खरीदना और बेचना चाहता है तो वह इसके लिए ब्रोकर की मदद ले सकता है। सबसे पहले डीमैट अकाउंट खुलवाना होगा। डीमैट अकाउंट को इसके बाद बैंक अकाउंट से लिंक कराना होगा। डीमैट अकाउंट में पैसे को ट्रांसफर करना होगा। ब्रोकर की वेबसाइट से खुद लॉग-इन या उसे ऑर्डर कर कंपनी के शेयर को खरीदा जा सकता है।

म्यूचुअल फंड के जरिए खरीद सकते हैं शेयर

अगर आप शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव से घबराते हैं या फिर शेयर मार्केट में निवेश के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं तो फिर आपके लिए म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना बेहतर हो सकता है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो शेयर मार्केट में सीधे निवेश करने की बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर हैंडसम रिटर्न हासिल कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड की वेबसाइट पर विजिट कर सीधे निवेश प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं। निवेश के लिए सलाहाकर की सेवा भी ली जा सकती है। डायरेक्ट प्लान में निवेश करने का फायदा यह है कि लोगों को इसके लिए दलालों को किसी तरह का कमीशन नहीं देना पड़ता है।

Stock Market के भाव में क्यों आता है उतार-चढ़ाव

कंपनी के शेयर के भाव में उतार-चढ़ाव भी आता है। कंपनी के कामकाज, ऑर्डर मिलने या छिन जाने, नतीजे बेहतर रहने और मुनाफा बढ़ने को कंपनी के शेयर के साथ जोड़कर देखा जाता है। अगर किसी कंपनी का मुनाफा बढ़ रहा है, उसके प्रोडक्ट के वैल्यू बढ़ी हुई है तो उसके शेयर के भाव भी बढ़ जाते हैं। इस मूल्यांकन के आधार पर मांग घटने-बढ़ने से उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है।

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शेयर खरीदने का मतलब

शेयर खरीदने का मतलब कंपनी के नफा-नुकसान में शामिल होना है। अगर कंपनी को फायदा हो रहा है, तो उसके शेयर होल्डर को भी इसका फायदा मिलता है। इसी तरह अगर किसी कंपनी को घाटा हो रहा है तो उसके शेयर होल्डर को भी नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस तरह यह समझा जा सकता है कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी कंपनी के शेयर को खरीदा है तो वह उतने हिस्से का मालिक हो गया है। निवेशक इस स्थिति में शेयर को दूसरे निवेशकों को बेच भी सकते हैं। शेयर खरीदने या बेचने की प्रकिया के लिए निवेशकों को ब्रोकर को कमीशन भी देना होता है। 

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Munendra Singh

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