सर्विस टैक्स (Service Tax) क्या होता है | सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज में क्या अंतर है

सर्विस टैक्स (Service Tax) क्या है

सर्विस टैक्स यानी सेवा कर। कोई व्यक्ति जब किसी किसी तरह की खास सुविधा हासिल करता है, तो उसे इसके लिए सर्विस टैक्स भी देना पड़ता है। प्रोडक्ट के साथ भी सर्विस टैक्स को जोड़ दिया जाता है। यह आमतौर पर सरकार द्वारा प्रदान की गई सेवाओं पर लगाया जाता है। इस आर्टिकल में सर्विस टैक्स (Service Tax) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज में क्या है अंतर है, इससे जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें ।

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सर्विस टैक्स (Service Tax) कहां लागू होता है

सर्विस टैक्स को भारत सरकार द्वारा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है। मोबाइल बिल, फिल्म टिकट, कोचिंग संस्थना सहित 120 से ज्यादा चीजों पर सर्विस टैक्स लगाया गया है। सर्विस टैक्स भरना जरूरी है और कोई भी व्यक्ति इससे इंकार नही कर सकता है। मौजूदा दौर में यह 15 फीसदी है। इसमें होटल, रेस्टोरेंट में मिलने वाले खाद्य और पेय पदार्थ भी शामिल हैं। भारत सरकार को सर्विस टैक्स के रूप में सबसे अधिक आय हो रही है। यह जीडीपी का 60 फीसदी तक है।

सर्विस टैक्स की शुरुआत कब हुई थी

भारत में सर्विस टैक्स वित्त अनिधिनियम 1994 के तहत शुरू किया गया था। कुछ राज्यों को छोड़कर यह सभी जगहों पर लागू हैं। सर्विस टैक्स का सीधा संबंध केंद्र सरकार के साथ है। राज्य सरकारें भी सर्विस टैक्स वसूल सकें, इसके लिए अधिनियम में संशोधन से संबंधित एक विधेयक को 2003 में संसद में पेश किया गया है। माना जाता है कि दूसरे सभी टैक्सों की तरह सर्विस टैक्स भी भारतीय अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है, जिसमें और सुधार की गुंजाइश है।

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सर्विस टैक्स के दायरे में क्या – क्या है

सर्विस टैक्स एक ऐसा टैक्स है, जिससे कोई नहीं बच सकता है। क्या गरीब और क्या अमीर, सभी इसके दायरे में हैं। अगर कोई व्यक्ति एक माचिस भी खरीदता है तो उसपर सर्विस टैक्स शामिल होता है। यानी देश में जितने भी तरह के प्रोडक्ट हैं, उनमें ज्यादातर की बिक्री पर सर्विस टैक्स शामिल है। यह खाद्य और पेय पदार्थों पर लागू हैं। इसी तरह छोटी-बड़ी कंपनियों और उद्योगों के जरिए जो भी प्रोडक्ट बाजार में बिक रहे हैं, उनसभी पर सर्विस टैक्स शामिल है।

सर्विस चार्ज क्या है

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज को एक ही चीज समझ लेते हैं। जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। सर्विस चार्ज आमतौर पर होटल और रेस्टोरेंट में वसूला जाता है। यहां खाने के लिए पहुंचे लोगों से सर्विस चार्ज लिया जाता है। इसे वेटर टिप भी कहा जा सकता है। सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं है। यह लोगों की मर्जी पर निर्भर है। अगर कोई अपनी खुशी से सर्विस चार्ज देना चाहता है तो वह दे सकता है। होटल और रेस्टोरेंट द्वारा जबरन वसूली नहीं की जा सकती है।  

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Service Tax के लिए सरकार की गाइडलाइंस

सरकार ने सर्विस चार्ज पर अपना रुख स्पष्ट किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में साफ कर दिया गया है कि सर्विस चार्ज के नाम पर किसी भी तरह की वसूली जबरन नहीं की जा सकती है। अगर कोई व्यक्ति सर्विस चार्ज नहीं देना चाहता है तो यह उसके अधिकार क्षेत्र में शामिल है। सर्विस चार्ज के खिलाफ न्यायालय में भी रिट फाइल की जा चुकी है। हालांकि कई ऐसे थिएटर हैं, जिसमें मल्टीप्लक्स की भूमिका बेहद खराब पाई गई है। यहां लोगों से सर्विस चार्ज के नाम पर जबरन वसूली की जाती है। बाजार में जिस पेय पदार्थ की कीमत 15-20 रुपये है, उसके लिए मल्टीप्लक्स में 200 रुपये वसूले जाते हैं। 

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Munendra Singh

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