राइट शेयर (Rights issue) क्या है | What is Rights issue Explained in Hindi

राइट शेयर (Rights issue) क्या होता है

ज्यादातर कंपनियों के शेयर होल्डर होते हैं। निवेशक कंपनियों के शेयर खरीदकर उनके हिस्सतेदार बन जाते हैं। किसी भी कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयर पर पहला अधिकार उस कंपनी के मौजूदा शेयर होल्डर का होता है। आमतौर पर इसी को राइट शेयर कहा जाता है। अगर मौजूदा शेयर होल्डर कंपनी द्वारा जारी किए गए नए शेयर में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं तो फिर दूसरे निवेशक उस शेयर को खरीद सकते हैं। इस आर्टिकल में राइट शेयर (Rights issue) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। राइट शेयर से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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Rights issue के लिए शेयर होल्डर होना चाहिए

किसी को शेयर खरीदने का अधिकार देना राइट शेयर है। कंपनियां यह अधिकार अपने मौजूदा शेयर होल्डरों को देती हैं। पूंजी को बढ़ाने के लिए ही शेयर जारी किया जाता है। राइट शेयर वही कंपनी जारी कर सकती है, जो पूर्व में शेयर जारी कर चुकी है। उसके पास मौजूदा शेयर होल्डर भी होना चाहिए। अगर किसी कंपनी के पास मौजूदा शेयर होल्डर नहीं है तो वह राइट शेयर जारी नहीं कर सकती है। इसकी एक और खास बात यह है कि अगर मौजूदा शेयर होल्डर राइट शेयर को नहीं खरीदना चाहते हैं तो फिर वे इसे दूसरे निवेशकों को बेच सकते हैं। कंपनियां इसके बदले शेयर होल्डरों को कमीशन देती हैं।

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राइट शेयर (Rights issue) का उद्देश्य

राइट शेयर का संबंध पूरी तरह कंपनियों के मौजूदा शेयर होल्डर्स के साथ है। सब्सक्राइब की गई शेयर पूंजी को बढ़ाने के लिए ही राइट शेयर जारी किए जाते हैं। इस तरह के शेयर को वर्तमान शेयर होल्डर्स खरीदते हैं। राइट शेयर आमतौर पर मौजूदा शेयर धारकों को प्रो-रेटा आधार पर जारी किए जाते हैं। कंपनी द्वारा सभी मौजूदा शेयर होल्डर्स को ऑफर लेटर भेजे जाते हैं, जिनमें जारी किए गए शेयर का जिक्र रहता है। इस तरह के शेयर को रियायती कीमतों पर बेचा जाता है। मौजूदा शेयर होल्डर्स निवेश को बढ़ाने के लिए राइट शेयर को खरीदते हैं।

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राइट शेयर की कीमत क्या होती है

राइट शेयर की दूसरी सबसे खास बात यह है कि इन्हें दूसरे तरह के शेयरों की तुलना में बेहद कम दामों में बेचा जाता है। यह बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचे जाते हैं, जिसकी वजह से मौजूदा शेयर होल्डर्स इसमें दिलचस्पी दिखाते हैं। इस तरह के शेयर की फेस वैल्यू पर आमतौर पर शेयर प्रीमियम जुड़ा रहता है। राइट शेयर को जारी करने के बाद कंपनियां उन्हें स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करती हैं, ताकि खरीद-फरोख्त में आसानी हो। कंपनियां राइट शेयर के माध्यम से पूंजी जुटाने का काम करती हैं। यही वजह है कि इसे कम कीमतों में बेचा जाता है, ताकि निवेशक इसमें दिलचस्पी दिखा सकें।

निवेशकों पर राइट शेयर का क्या असर पड़ता है

निवेशकों पर राइट शेयर का पॉजीटिव असर पड़ता है। अगर कोई निवेशक किसी कंपनी के साथ लंबे समय से जुड़ा है तो वह कंपनी के बारे में अच्छी तरह जानता है। कंपनी का बिजनेस और रिस्पॉंस कैसा है, इसकी जानकारी भी शेयर होल्डर को रहती है। इसलिए राइट शेयर को खरीदने में उसे किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। हालांकि राइट शेयर की खरीदारी के समय भी सावधान रहने की जरूरत है। अगर बाजार में कंपनी के प्रोडक्ट की वैल्यू कम हो रही है तो जाहिरी तौर पर इसका असर उसकी इनकम पर भी पड़ेगा। जब कमाई घटेगी तो इसका असर निवेशकों पर भी पड़ना तय है।

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कंपनियां राइट शेयर को पब्लिक में जारी कर सकती हैं

कंपनियों द्वारा जारी राइट शेयर को अगर मौजूदा शेयर होल्डर नहीं खरीदते हैं या फिर सीधे तौर पर इसे रिजेक्ट कर देते हैं तो फिर कंपनियां शेयर को बाजार में बेचने के लिए अधिकृत होती हैं। मौजूदा शेयर होल्डरों द्वारा रिजेक्शन के बाद कंपनियां इसे बाजार में अपने रेट के हिसाब से बेचती हैं। कोई भी निवेशक इसके बाद राइट शेयर को खरीदने का अधिकार रखता है। इस तरह कंपनियां राइट शेयर को मौजूदा शेयर होल्डरों के साथ नए निवेशकों के लिए भी जारी करती हैं।

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Munendra Singh

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