रेकरिंग डिपॉजिट | Recurring deposit (आवर्ती जमा) क्या है | RD Scheme in Hindi

Recurring Deposit (RD)

रेकरिंग डिपॉजिट यारी आवर्ती जमा… जो लोग महीने या सालभर होने वाले अलग-अलग तरह के खर्च को लेकर टेंशन में रहते हैं, वे रेकरिंग डिपॉजिट के तहत खाता खुलवा सकते हैं। खाते में आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे जमा कर सकते हैं। लिमिट पूरी होने के बाद पैसे आपको मिल जाएंगे। बैंक इसपर ब्याज भी देते हैं। इस आर्टिकल में रेकरिंग डिपॉजिट (Recurring Deposit) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसके फायदे और नुकसान से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

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Recurring Deposit (आवर्ती जमा) का सुविधा बैंकों और डाकघरों में

रेकरिंग डिपॉजिट (Recurring Deposit) एक तरह की जमा योजना है। इसके लिए बैंकों और डाकघरों में खाते खुलवाए जा सकते हैं। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो रेकरिंग डिपॉजिट के तहत छोटी-छोटी बचत को बड़ा बना रहे हैं। कोई भी व्यक्ति नजदीकी बैंक या फिर पोस्ट ऑफिस में पहुंचकर जमावर्ती योजना का हिस्सा बन सकता है। बैंकों और डाकघरों में इसपर दिए जाने वाले ब्याज पर थोड़ा अंतर है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे खाता खुलवाने से पहले दोनों जगहों से इसकी जानकारी हासिल कर लें।

Recurring Deposit (आवर्ती जमा) की अवधि

राष्ट्रीय बैंकों और डाकघरों में रेकरिंग डिपॉजिट योजना के तहत आमतौर पर एक से दस साल तक के लिए खाता खुलवा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 3 महीने के लिए खाता खुलवाना चाहता है, तो बैंक और डाकघरों में इसकी सुविधा भी है। यानी लोग अपनी जरूरत के हिसाब से 3, 6, 9 या फिर 12 महीने तक के लिए भी खाता खुलवा सकते हैं। खाता खुलवाते समय पैसे जमा करने की लिमिट भी तय करना होगा।

रेकरिंग डिपॉजिट के तहत सैलरी या आमदनी के हिसाब से जमा कर सकते हैं पैसे

अगर आपका किसी बैंक में सैलरी अकाउंट है तो आप अपनी सैलरी के हिसाब से रेकरिंग डिपॉजिट के तहत पैसे जमा कर सकते हैं। बैंकों और डाकघरों की तरफ से शहरी इलाकों में मौजूद खाताधारकों के लिए हर महीने 1 हजार रुपये और ग्रामीण इलाकों के खाताधारकों के लिए 500 रुपये की न्यूनतम राशि तय की गई है। खाताधारक इसके बाद अपनी सुविधा के हिसाब से ज्यादा पैसे भी जमा कर सकते हैं।

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जमावर्ती योजना के तहत तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि ब्याज

जमावर्ती योजना की सबसे खास बात यह है कि इसपर बैंकों और डाकघरों द्वारा तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि ब्याज दिए जाने का प्रावधान है। ब्याज की दरें अलग-अलग हैं। यानी बैंकों और डाकघरों द्वारा अलग-अलग ब्याज दरों के साथ भुगतान किया जा रहा है। ब्याज की रकम मूलधन के साथ जोड़कर एक बार में अदा की जाएगी। इसके लिए बैंकों और डाकघरों के नियमों का पालन करना होगा।

सैलरी अकाउंट से ऑटोमेटिक पैसा कट जायेगा रेकरिंग डिपॉजिट के लिए

अगर आपका किसी बैंक में सैलरी अकाउंट है और आप रेकरिंग डिपॉजिट के तहत पैसे जमा करना चाहते हैं तो इसके लिए एक अकाउंट से पैसा निकालकर दूसरे अकाउंट में पैसा डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेकरिंग डिपॉजिट के लिए पैसे की लिमिट तय करने के बाद यह सैलरी अकाउंट से खुद-ब-खुद डिटेक्ट हो जाएगा। इसके लिए बैंकों के चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

रेकरिंग डिपॉजिट से स्कूल फीस की टेंशन भी खत्म

अगर आप बच्चों की सालाना स्कूल फीस, एडमिशन फीस या कोचिंग फीस जमा करते हैं तो फिर रेकरिंग डिपॉजिट के तहत एक साल के लिए खाता खुलवाया जा सकता है। सालभर तक इस खाते में पैसे जमा होते रहेंगे। एक वर्ष पूरा होने के बाद आपको तिमाही चक्रवृद्धि ब्याज के हिसाब से मूलधन का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद आप इन पैसों से स्कूल की फीस वगैरह भर सकते हैं। अगर 2 हजार रुपये मासिक किस्त के हिसाब से पैसे जमा कर रहे हैं तो एक साल में करीब 25 हजार रुपये मिल सकते हैं। इसकी वजह से टेंशन काफी कम हो जाती है।

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रेकरिंग डिपॉजिट के तहत बीच में पैसे नहीं निकाल सकते हैं

रेकरिंग डिपॉजिट के तहत खाता खुलवाने और उसमें पैसे जमा करने का सिलसिला शुरू होने के बाद लिमिट से पहले पैसे नहीं निकाल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति ने एक साल के लिए खाता खुलवाया है तो उसे इस लिमिट को पूरा करना होगा। बीच में पैसे नहीं निकाले जा सकते हैं। इसलिए खाता खुलवाने से पहले बैंकों और डाकघरों के जरिए इससे संबंधित पूरी जानकारी हासिल कर लेना बेहतर है।

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Munendra Singh

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