भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है | RBI के कार्य | अधिकार | दिशा-निर्देशों की जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को आमतौर पर नोटों की छपाई और पैसों की आपूर्ति करने के लिए जाना जाता है, लेकिन उसका कार्य क्षेत्र इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। चाहे विदेशी मुद्रा भंडार को नियंत्रित करने का मामला हो या फिर आर्थिक संकट के दौर में भारत सरकार और बैंकों की मदद करना हो, आरबीआई (RBI) के पास इस तरह की कई बड़ी जिम्मेदारी है। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए भी आरबीआई (RBI) अपनी अहम भूमिका निभाता है। इस आर्टिकल में आरबीआई (RBI) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। उसकी स्थापना का उद्देश्य, कार्य क्षेत्र, दिशा-निर्देश आदि से जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी अच्छी तरह विस्तारित किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं।

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आरबीआई(RBI) का फुल फार्म और स्थापना

आरबीआई (RBI) का फुल फार्म “रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया” यानी “भारतीय रिजर्व बैंक” है। आरबीआई की स्थापना आर्टिकल 1934 के तहत 1935 में की गई थी। यह भारत की सर्वोच्च मौद्रिक संस्था है। भारतीय रिजर्व बैंक आमतौर पर विदेशी मुद्रा भंडार, भारतीय बैंक, ऋण नियंत्रक के रूप में काम करता है। नोटों की छपाई और पैसों की आपूर्ति का प्रबंधन संभालने की जिम्मेदारी भी आरबीआई के पास है।

आरबीआई(RBI) का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था 

आरबीआई की शुरुआत पांच करोड़ रुपये के साथ हुई थी। शेयरों का स्वामित्व गैर सरकारी शेयरधारकों के हाथों में था। आजादी के बाद 1 जनवरी, 1949 को भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था। राष्ट्रीयकरण के बाद उसके शेयरों का स्वामित्व उसी के पास आ गया। राष्ट्रीयकरण करने का मुख्य उद्देश्य ही आरबीआई का दायरा बढ़ाना था।

नोटों को छापने का अधिकार किसके पास है

न्यूनतम रिजर्व प्रणाली के तहत आरबीआई के पास नोटों को छापने का अधिकार है। एक रुपये के अलावा आरबीआई सभी तरह के नोट छापता है। एक रुपये का नोट या सिक्का वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में 200 करोड़ रुपये रिजर्व रखता है। इसमें 115 करोड़ रुपये सोने के रूप में, जबकि बची हुई रकम मुद्राओं के रूप में होनी चाहिए। नोटों को छापने के लिए आरबीआई को भारत सरकार से अनुमति लेना पड़ता है।

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बैंकों का बैंक किसे कहते है

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बैंकों का बैंक भी कहा जाता है। पब्लिक सेक्टर के बैंक जिस तरह अपने खाताधारकों के लिए काम करते हैं, ठीक उसी तरह आरबीआई बैंकों के लिए काम करता है। आरबीआई देश के सभी वाणज्यिक बैंकों को उधार भी देता है। उधार के लिए पैसों का निर्धारित नहीं किया गया है। यह आरबीआई की जरूरत और विवेक का हिस्सा है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति

आरबीआई ऋण को नियंत्रति करने का काम करता है। आरबीआई को जब यह लगने लगता है कि देश में मुद्रास्फीति की स्थिति पैदा हो सकती है तो अपने कड़े मौद्रिक नीति के आधार पर बाजारों में पैसों की आपूर्ति को कम कर देता है। इसी तरह जब अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति कम हो जाती है तो वह बाजार में पैसों की आपूर्ति को बढ़ा देता है। इसकी वजह से बाजार में बैलेंस बना रहता है।

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आरबीआई (RBI) और विदेशी मुद्रा भंडार

आरबीआई के पास सबसे बड़ी जिम्मेदारी विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने की है। भारत के पास फिलहाल विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में करीब 360 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा को बेचने का अधिकार भी है। विदेश विनिमय बाजार में जब विदेशी मुद्रा भंडार की कमी आ जाती है तो आरबीआई इसे बेच सकता है। इसी तरह जब विदेशी बाजार में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ जाती है तो आरबीआई विदेशी मुद्रा को खरीदने का काम करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वित्तीय बाजार विभाग का गठन

भारतीय रिजर्व बैंक में नए विभाग का गठन किया गया है। 2005 में वित्तीय बाजार विभाग के रूप में गठित यह विभाग भविष्य में ऋण प्रबंधन और मौद्रिक संचालन की गतिविधियों को अलग कर सकता है। मुद्रा बाजार के उपकरणों के विकास और उसकी निगरानी का कार्य भी करेगा। इसके अलावा दूसरे कई और मुख्य कार्य भी हैं, जिन्हें वित्तीय बाजार विभाग के जरिए कराए जा सकते हैं।

आरबीआई (RBI) के दूसरे अहम कार्य

  • आरबीआई इंग्लैंड में 90 दिन में भुगतान होने वाले विनिमय बिलों को भुनाता और क्रय-विक्रय भी करता है।
  • आरबीआई विदेशी बैंकों में अपना खाता खोलता है। एजेंसी के रूप में बैंकों के साथ संबंध स्थापित करता है।
  • जरूरत पड़ने पर ऋण लेता और देता है। भारत में 15 माह की अवधि के कृषि संबंधित बिलों का क्रय-विक्रय भी करता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक सरकार या जनता से बिना ब्याज के रुपये प्राप्त करता है। यह व्यवस्था जमा राशि के लिए है।

नोट छापाखानों का संचालन भारत में कहाँ – कहाँ है

मुद्रा की समुचित मात्रा को चलन में लाने के लिए छापाखानों का संचालन किया जा रहा है। निर्गमन विभाग के 10 कार्यालय हैं। बंगलूरू, कोलकाता, कानपुर, हैदराबाद, मद्रास, नागपुर, पटना, नई दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में मौजूद छापाखानों में नोटों की छपाई का कार्य किया जाता है। यहां से बैंकों के लिए नोटों की आपूर्ति भी की जाती है।

आरबीआई के पास कितनी तिजोरियां हैं

छापाखानों की तरह भारतीय रिजर्व बैंक की देशभर में तिजोरियां हैं, जहां बड़े पैमाने पर पैसों को रखा जाता है। भारत में करीब 2000 स्थानों पर आरबीआई की तिजोरियां हैं, जिन्हें मुद्रा के भंडारण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ये तिजोरियां आमतौर पर स्टेट बैंक और अन्य सहायक बैंकों क प्रमुख शाखाओं में रखी जाती हैं। आरबीआई सीधे तौर पर इनकी निगरानी करता है।

बैंक दर में परिवर्तन करने का अधिकार

  • आरबीआई के पास बैंकों की दरों में परिवर्तन करने का अधिकार भी है। नकद कोष अनुपात में परिवर्तन कर सकता है।
  • खुले बाजार की क्रियाएं भी कर सकता है। उसके कार्य क्षेत्र में मुद्रा और साख संबंधित कड़े एकत्रित करना भी शामिल है।
  • आरबीआई देश में बैंकिंग शिक्षा की समुचित व्यवस्था करता है। बड़े नोटों के बदले छोटी-छोटी इकाई की मुद्रा को परिवर्तित भी करता है।
  • आर्थिक संकट से जूझ रहे बैंकों की मदद करता है। जरूरत पड़ने पर भारत सरकार की मदद भी की जाती है।

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Munendra Singh

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