पोर्टफोलियो क्या है | Portfolio Meaning in Hindi (शेयर बाजार)

पोर्टफोलियो (Portfolio) क्या होता है

शेयर मार्केट में निवेश के लिए आमतौर पर पोर्टफोलियो की जरूरत पड़ती है। निवेशक पोर्टफोलियो में विभिन्न निवेशों के साथ सार्वजनिक व्यापारिक प्रतिभूतियों को भी शामिल कर सकते हैं। पोर्टफोलियो बनाने के अपने कई फायदे हैं और यही वजह है कि ज्यादातर निवेशक इस टर्मनोलॉजी पर भरोसा भी करते हैं। इस आर्टिकल में पोर्टफोलियो (Portfolio) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। पोर्टफोलियो बनाने के क्या फायदे हैं, इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

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पोर्टफोलियो (Portfolio) के फायदे

पोर्टफोलियो (Portfolio) के कई छोटे-बड़े फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक इसके जरिए अपने सभी तरह के निवेश पर पूरी निगरानी रख सकता है। पोर्टफोलियो निवेश के फायदे और नुकसान से भी अवगत कराता है। समय-समय पर पता चलता है कि निवेश की वजह से फायदा हो रहा है या फिर नुकसान। पोर्टफोलियो को मैनेज कर रिस्क को कम किया जा सकता है। चूंकि एक समय में निवेश के सभी सेक्टर्स अपने निचले स्तर पर नहीं होते हैं, इसलिए इसके जरिए मदद मिल सकती है। फायदा या नुकसान को ध्यान में रखते हुए उचित पोर्टफोलियो तैयार किया जा सकता है। पहले से तैयार पोर्टफोलियो में बदलाव भी संभव है।

पोर्टफोलियो (Portfolio) कैसा हो

पोर्टफोलियो काफी मायने रखता है। शेयर बाजार में निवेश के लिए यह बहुत जरूरी है। पोर्टफोलियो कैसा हो, यह पूरी तरह रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर है। अगर निवेशक की उम्र कम है तो उसकी रिस्क लेने की क्षमता ज्यादा हो सकती है। इस तरह उसके पोर्टफोलियो में स्मॉल कैप और मिड कैप फंड की संख्या लार्ज कैप फंड से अधिक हो सकती है। यही नहीं, उसके पोर्टफोलियो में जो भी निवेश होगा, वह ज्यादा आक्रमक भी हो सकता है। वहीं अगर निवेशक की उम्र ज्यादा है तो उसकी रिस्क लेने की क्षमता कम होगी। ऐसे में उसके निवेश में लार्ज कैप फंड की संख्या अधिक होती है। इस तरह यह समझा जा सकता है कि पोर्टफोलियो काफी हद तक रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर है।

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पोर्टफोलियो में बदलाव

पोर्टफोलियो में समय के साथ बदलाव की संभावना रहती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि समय के साथ यह जरूरी भी है। निवेशक इस तरह रिस्क को सुरक्षित कर सकते हैं। चूंकि शुरुआती दिनों में ज्यादातर निवेशक पोर्टफोलियो को रिस्क के हिसाब से आक्रमक रखते हैं, लेकिन वे जैसे-जैसे टारगेट के करीब पहुंचते हैं, पोर्टफोलियो को रक्षात्मक श्रेणी में लाने की कोशिश करते हैं। इस स्थिति में निवेश में स्मॉल कैप की बजाय लार्ज कैप फंड की संख्या ज्यादा की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो फिर पोर्टफोलियो में रिस्क की मात्रा खुद-ब-खुद कम हो जाएगी।

पोर्टफोलियो में निवेश का समय

निवेशकों को यह भी मालूम होना चाहिए कि पोर्टफोलियो बनाने के बाद उन्हें कितने समय तक पैसा लगाना चाहिए। निवेशकों को आमतौर पर अपने लक्ष्य पर ध्यान रखना चाहिए। लक्ष्य के करीब पहुंचने पर पोर्टफोलियो को रक्षात्मक मुद्रा में ले आना चाहिए। ऐसा करने से निवेश के बाद हो चुकी ग्रोथ को सुरक्षित किया जा सकता है। इस स्थिति में निवेशक खुदा को ज्यादा सुरक्षित महसूस तो कर ही सकते हैं, उन्हें पोर्टफोलियो बनाने का फायदा भी मिल सकता है।

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पोर्टफोलियो (Portfolio) को संतुलित कैसे करें

पोर्टफोलियो को रीबैलेंसिंग यानी संतुलित करने की जरूरत पड़ती है। निवेशक ज्यादा लालच के चक्कर में कभी-कभी पोर्टफोलियो को संतुलित नहीं करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ता है। पोर्टफोलियो को संतुलित करते समय लागत, लोड और टैक्सेशन को देख लेना चाहिए। रीबैलेंसिंग का मकसद मार्केट की टाइमिंग का पता लगाना कतई नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड सलाहकार समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए कहते हैं।

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Munendra Singh

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