राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) क्या है | एनएफएसए फुल फॉर्म | नियम की जानकारी

National Food Security Act

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बीपीएल कार्ड धारकों की सूचि में शामिल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के साथ ही एपीएल कार्ड धारकों को भी सस्ता अनाज मिल रहा है। यह अधिनियम लोगों को अनाज और पोषण के एतबार से सुरक्षित करता है। उन्हें सरकार द्वारा वितरित किए जा रहे सस्ता अनाज हासिल करने का कानूनी हक प्राप्त है। इस आर्टिकल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। अलग-अलग वर्ग में शामिल लोगों को कितना अनाज मिलेगा, इस पहलु पर भी रोशनी डाली जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।

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एनएफएसए (NFSA) लागू हुआ था

नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट (एनएफएसए) यानी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में लागू हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में इस बिल को पास कराया गया था। कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए-2 कार्यकाल की यह बहुत बड़ी उपलब्धी थी। इस अधिनियम का उद्देश्य देश के गरीब और आम लोगों को सस्ता अनाज मुहैया कराना है। बाद की सरकारें इस योजना को बंद न कर सकें, इसके लिए यह अधिनियम बनाया गया, जो लोगों को एक तरह की सुरक्षा प्रदान करता है।

एनएफएसए (NFSA) का दायरा

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट (एनएफएसए) के दायरे को भी बहुत बड़ा किया गया है। इसके लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों, दोनों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। इस अधिनियम के तहत जहां 75 फीसदी ग्रामीण इलाकों को टच किया गया है, वहीं 50 फीसदी शहरी इलाकों को भी इसके दायरे में लाया गया है। इस तरह यह देश की दो तिहाई आबादी को कवर करता है। संभव है कि आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ाया जाए।

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एनएफएसए (NFSA) के तहत प्रति माह कितना किलोग्राम अनाज मिलता है

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का फायदा देश के गरीब लोगों को मिल रहा है। बीपीएल कार्ड धारकों की सूचि में शामिल अत्यंत गरीब परिवारों के लिए मुनासिब अनाज की व्यवस्था की गई है। उन्हें हर महीने 35 किलोग्राम सस्ता अनाज मुहैया कराया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से चावल, गेंहू, दाल, चीनी शामिल है। मिट्टी का तेल भी वितरित किया जाता है, लेकिन सरकार अब इसपर फोकस नहीं कर रही है। ज्यादातर जगहों पर कोटेदोरों के लिए तेल की सप्लाई रोक दी गई है।

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत कितने रुपये प्रतिकिलो अनाज

एनएफएसए के तहत गरीबों को 2 रुपये प्रतिकिलो गेहूं और 3 रुपये प्रतिकिलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। इस अधिनियम के तहत देशभर के करीब 80 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए सस्ते दरों पर अनाज की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सब्सिडी निर्धारित की गई है। गेहूं और चावल की असल कीमत सरकार अदा करती है। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अनाज का वितरण किया जाता है। कानून के तहत एफसीआई को हर महीने अनाज का वितरण करना है।

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एनएफएसए से एपीएल कार्ड धारकों को भी फायदा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम देश के मध्यम वर्गीय परिवार वालों को भी लाभांवित कर रहा है। इसमें मुख्य रूप से एपीएल कार्ड धारक शामिल हैं। यानी गरीबी रेखा से ऊपर जीवन गुजार रहे लोगों को भी इस अधिनियम के तहत अनाज वितरित किया जा रहा है। उन्हें अलग-अलग शर्तों के साथ 20 किलोग्राम तक अनाज मुहैया कराया जा रहा है। इसमें गेहूं मुख्य रूप से गेहूं और चावल शामिल है। जरूरत के हिसाब से चीनी और दालों की सप्लाई भी की जाती है। 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत महिलाओं के स्वस्थ का ध्यान रखती है

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम न सिर्फ अनाज की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि महिलाओं को स्वस्थ रखने के साथ बच्चों को कुपोषण से भी बचाता है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को बच्चों के पालन पोषण के लिए 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। उन्हें इस योजना के तहत छह महीने तक मातृत्व लाभ मिलता है। यह योजना पूरे देशभर के लिए लागू है और इसमें अभी तक किसी तरह का संशोधन नहीं किया गया है। मौजूदा सरकार भी इसपर ध्यान दे रही है।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम द्वारा कुपोषण दर में कमी

इस अधिनियम की खास बात यह है कि इसकी वजह से भारत में कुपोषण दर में कमी आई है। छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बच्चों की स्थिति बेहतर हुई है। यहां के बंजर इलाकों में कुपोषण के मामले अब कम आ रहे हैं। 14 साल के बच्चे निर्धारित पोषण मानकों के अनुसानर पौष्टिक भोजन के हकदार हैं। योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को मिल रहा है। उन्हें इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है। गांव और तहसील स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को योजना के फायदे बताए जा रहे हैं। राज्य सरकारें भी इसमें सहयोग कर ही हैं।

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Munendra Singh

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