नाफेड क्या है | NAFED Full Form in Hindi | NAFED Explained in Hindi

नाफेड (NAFED) क्या होता है

नाफेड (NAFED) किसानों से अनाज खरीदता है। अनाज को बाद में बाजारों में वितरित किया जाता है। सरकार ने इसके लिए नाफेड की जिम्मेदारी तय की है। किसानों को अनाज के बदले उचित दाम मिलने चाहिए, जिसके लिए नाफेड (NAFED) सरकार के नियमानुसार काम करता है। इस आर्टिकल में नाफेड (NAFED) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इससे जुड़ सभी जरूरी पहलुओं को साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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नाफेड का फुलफार्म | NAFED Full Form

नोफेड का फुलफार्म “National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India / नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया” है, जिसे हिंदी में “राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ” कहते हैं। यह केंद्र सरकार के अधीन है। भारत सरकार के नियमुनासार ही अनाज की खरीद और फरोख्त की जाती है। सरकार ने इसके लिए अलग-अलग चेन बनाई है और नाफेड एक चेन के रूप में लोगों तक अनाज पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाता है।

नाफेड (NAFED) का उद्देश्य

इसे ठीक से समझने की जरूरत है। किसान खेतों में गल्ला यानी अनाज उगाता है। वह अनाज को बाजारों में सीधे नहीं बेच सकता है। नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी नाफेड किसानों से उनके अनाज को खरीदता है। किसानों को इसके बदले उचित कीमत दी जाती है। इस अनाज को सरकार के बफर स्टॉक में जमा कर दिया जाता है। यहां से अब एफसीआई यानी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का काम शुरू होता है। नाफेड जिस अनाज को किसानों से खरीदकर बफर स्टॉक में जमा करता है, उसे बाजारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एफसीआई के पास है।

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नाफेड के तहत अनाज की खरीद-फरोख्त

नाफेड किसानों से खाद्य पदार्थों से लेकर तेलहन तक सभी तरह के सामान खरीदता है। इसमें गेहूं, चावल, दालें, चीनी, सरसों का तेल आदि शामिल है। नाफेड बाजार को भी ध्यान में रखता है। कभी-कभी अनाज की उपज बहुत ज्यादा हो जाती है, जिसकी वजह से नाफेड उसे बड़े पैमाने पर तो खरीदता है, लेकिन इसके लिए मूल्यों को भी ध्यान में रखा जाता है। सरकार की कोशिश यही होती है कि किसानों को उचित कीमतों का भुगतान किया जाए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

एमएसएपी रेट क्या है

एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य, जो किसानों का हक है। नाफेड अनाज की खरीदारी एमएसपी पर ही करती है। किसानों को किसी तरह का नुकसान न हो, इसलिए ऐसा किया जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि बाजार में सीधे अनाज बेचने पर किसानों को ज्यादा फायदा हो सकता है, इसलिए उन्हें इसकी छूट मिलनी चाहिए। हालांकि सरकार ऐसा नहीं मानती है। उसका तर्क है कि बाजार में सीधे अनाज की बिक्री से किसानों को नुकसान होगा। उन्हें एमएसपी से भी कम रेट पर अपने अनाज को बेचना पड़ेगा।

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नाफेड का कार्य अनाज की भंडारण क्षमता को बढ़ाना

नाफेड का दूसरा उद्देश्य यह भी है कि सरकार के बफर स्टॉक की क्षमता को बढ़ाया जाए। बफर स्टॉक ज्यादा होने की वजह से आपदा के समय पर लोगों को अनाज के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। किसानों को अक्सर मौसम की मार का सामना करना पड़ता है। कभी ज्यादा बारिश की वजह से उनकी फसल खराब हो जाती है तो कभी-कभी इतनी कम बारिश होती है कि इसका असर अनाज की फसल पर पड़ता है। ऐसे में नाफेड को यह देखना रहता है कि बफर स्टॉक कम न होने पाए।

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Munendra Singh

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