जीवन बीमा (Life insurance) क्या होता है | कितने प्रकार के होते है | लाभ | उद्देश्य

Life insurance

भारत में ज्यादातर लोग आमतौर पर भविष्य में संभावित नुकसान की भरपाई के लिए ही जीवन बीमा कराते हैं। जिंदगी खतरे के साथ चलती है और यह कभी भी आ सकता है। इंसान को कभी बीमारी के रूप में तो कभी कारोबार को नुकसान पहुंचने के रूप में खतरों का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए जीवन बीमा (Life insurance) कराया जाता है और समय पर यह काम भी आता है। इस आर्टिकल में जीवन बीमा के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बीमा कितने प्रकार के होते हैं, इस तथ्य पर भी रोशनी डाली जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिर तक पढ़ें।

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जीवन बीमा के तहत जोखिम से सुरक्षा

इंश्यारेंस का सीधा मतलब जोखिम से सुरक्षा हासिल करना है। अगर कोई कंपनी किसी आदमी का बीमा करती है तो उसके आर्थिक नुकसान की भरपाई भी कंपनी द्वारा ही किया जाता है। बीमा हकीकत में कंपनी और बीमा धारक के बीच एक समझौता या करार है, जसे कानूनी दायरे में रहकर पूरा किया जाता है। इसे किसी अत्प्रत्याशित नुकसान से बचने के लिए एक हथियार के रूप में भी देखा जा सकता है। भारत में बीमाधारकों की बड़ी संख्या है और इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।

कंपनियां लेती हैं प्रीमियम

बीमा कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए बीमा धारकों को समय पर आर्थिक मदद जरूर देती हैं, लेकिन इसके लिए प्रीमियम भी वसूला जाता है। बीमा कंपनियां प्रीमियम के रूप में सभी धारकों से एक निर्धारित समय के लिए निश्चित रकम वसूल करती हैं। इसके बदले बीमा धारकों को ब्याज के साथ रिटर्न भी दिया जाता है। इसके लिए पॉलिसी की सभी शर्तों को पूरा करना होता है। दोनों के बीच अगर किसी तरह का विवाद पैदा होता है तो इसके निपटारे के लिए आईआरडीए का गठन भी किया गया है।

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बीमा (Insurance) के प्रकार

बीमा के आमतौर पर दो प्रकार हैं। पहला जीवन बीमा और दूसरा साधारण बीमा। भारत में ज्यादातर बीमा इन्हीं दो प्रकार के होते हैं। बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो जीवन बीमा को तरजीह देते हैं। जीवन बीमा का मकसद परिवार की सहायता करना होता है, जबकि साधारण बीमा के तहत आर्थिक स्थिति से जुड़े दूसरे सभी जरूरी पहलुओं को मजबूत किया जाता है। आईआरडीए ने इसके लिए पूरी गाइडलाइंस तैयार की है। कंपनियों और बीमा धारकों, दोनों को इसपर अमल करना होता है।

जीवन बीमा (Life Insurance)

जीवन बीमा का मतलब यह है कि बीमा पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार या नॉमिनी को कंपनी की तरफ तय मुआवजा दिया जाता है। परिवार को आर्थिक संकट से बचाने के लिए ही जीवन बीमा कराया जाता है। ऐसे परिवार के लिए बीमा जरूरी है, जहां एक व्यक्ति के कंधों पर ही पूरे परिवार की जरूरतें टिकी हैं। ऐसी स्थिति में अगर उस व्यक्ति की मौत हो जाती है तो पूरे परिवार पर पहाड़ टूट जाता है। घरेलू जिंदगी से लेकर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और कारोबार तक प्रभावित होता है। यही वजह है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग जीवन बीमा कराते हैं और उनके परिवार वालों को इसका फायदा भी मिलता है।

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साधारण बीमा(General Insurance)

साधारण बीमा में कई तरह के बीमा शामिल हैं। साधारत बीमा के तहत वाहन, घर, हेल्थ, फसल आदि का बीमा कराया जाता है। सामान का बीमा भी कराया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति ने कंप्यूटर या लैपटॉप का बीमा कराया है तो उसके टूटने-फूटने पर कंपनी द्वारा इसके लिए मुआवजा दिया जाता है। इसी तरह किसी भी चीज के लिए बीमा कराया जाता है। उसके क्षतिग्रस्त होने, खोने या फिर चोरी होने पर बीमा धारकों को हर्जाना दिया जाता है।

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)

साधारण बीमा में स्वास्थ्य बीमा भी शामिल है। भारत में लोगों के अंदर स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है। वे अपनी बीमारी या आने वाली बीमारी को लेकर गंभीर हैं। इसके लिए हेल्थ बीमा कराया जाता है। बीमार होने पर कंपनियों द्वारा इसका खर्च दिया जाता है। हेल्थ बीमा की रकम बीमा पॉलिसी पर निर्भर करती है। यानी जितना ज्यादा प्रीमियम भरा जाएगा, बीमारी पर इलाज के लिए उतने ज्यादा पैसे भी दिए जाएंगे।

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यात्रा और फसल बीमा

यात्रा बीमा भी कराया जाता है। यात्रा के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई कंपनियों द्वारा किया जाता है। यात्रा के दौरान कई तरह के खतरे होते हैं। एक्सिडेंट का खतरा होता है, जिसमें व्यक्ति को गंभीर रूप से चोटें लग जाती हैं। कभी-कभी उसका सामान गुम हो जाता है। यात्रा बीमा इस तरह की चीजों को कवर करती है। इसी तरह फसल बीमा भी जरूरी हो गया है। आपदा की वजह बर्बाद होने वाली फसल के लिए कंपनियों द्वारा किसानों को मुआवजा दिया जाता है। आग लगने, ज्यादा बारिश की वजह से फसल नष्ट होने और बाढ़ की वजह से खराब हुई फसलों के लिए भी हर्जाना दिया जाता है। कंपनियां इसके लिए पहले खेतों का सर्वे करती हैं।

कारोबार बीमा (Business Insurance)

कंपनियां इसी तरह कारोबार बीमा भी करती हैं। यह बीमा मुख्य रूप से काम-काज या किसी उत्पाद से ग्राहकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए होता है। कंपनियां इस स्थिति में बीमा धारकों को प्रीमियम के हिसाब से मुआवजा देती हैं। कंपनियां इसके लिए भी सर्वे कराती हैं। आमतौर पर मुआवजा के लिए सर्वे कराने का नियम है। एजेंटों द्वारा सर्वे रिपोर्ट सौंपने के बाद ही कंपनियां हर्जाना भरने के लिए तैयार होती हैं।

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Munendra Singh

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