IRDAI क्या है | आईआरडीए (IRDA) का फुल फॉर्म | कार्य, अधिकार की जानकारी

आईआरडीए (IRDA) क्या होता है

आप ने अगर किसी तरह की पॉलिसी ले रखी है तो आईआरडीए (IRDA) के बारे में जानना जरूरी है। आईआरडीए बीमा कंपनी और धारक के बीच की कड़ी है, जो न सिर्फ बीमा धारकों के हितों की सुरक्षा करता है, बल्कि बीमा उद्योग क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भी कटिबद्ध है। इस आर्टिकल में आरआरडीए के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बीमा अधिनियम से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।

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आईआरडीए का फुलफार्म | IRDA KA FULL FORM

आईआरडीए का फुलफार्म “Insurance Regulatory and Development Authority/ बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण” है। आईआरडीए मुख्य रूप से बीमा धारकों के हितों की सुरक्षा करता है। बीमा कंपनी और बीमा धारकों के बीच विवाद को निपटाता है। बीमा बाजार में पारदर्शिता लाने की कोशिश तो रहती ही है, धोखाधड़ी को रोकना भी है। शिकायतों पर बीमा कंपनी और संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

आईआरडीए के मुख्य कार्य

आईआरडीए “Insurance Regulatory and Development Authority / बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण” बीमा से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर काम करता है। पॉलिसी के सरेंडर मूल्य, बीमा दावों का समाधान तो करता ही है, बीमा अनुबंध के अन्य नियमों को भी पूरा करता है। बीमा योग्य ब्याज और पॉलिसी धारकों द्वारा नामांकन प्रक्रिया को भी पूरा करता है। बीमा की शर्तों को पूरा करना और बीमाधारकों की हितों की सुरक्षा करना ही आईआरडीए का मुख्य कार्य है।

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आईआरडीए बीमा कंपनियों को पंजीकरण और विनियमन

आईआरडीए बीमा कंपनियों को पंजीकृत भी करता है। अगर कोई कंपनी बीमा के क्षेत्र में कार्य करना चाहती है तो उसे पहले आईआरडीए के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बीमा की नई कंपनियां भी रजिस्ट्रेशन के बाद ही कारोबार कर सकती हैं। यही नहीं, आईआरडीए आमतौर पर जनरल इंश्योरेंस के मामलें बीमा धारकों के नुकसान का आकलन भी करता है। कंपनियों को आचार संहिता के दायरे में लाया जाता है। इसी तरह बीमा कारोबार के संचालन में प्रवीणता को बढ़ावा भी देता है।

IRDAI के तहत विवादों का निपटारा

आईआरडीए मुख्य रूप से बीमा कंपनियों और बीमा धारकों के बीच की एक कड़ी है, जो दोनों को अधिनियम के दायरे में संचालित करने का काम करता है। अगर किसी मामले को लेकर कंपनी और बीमाधारकों के बीच कोई विवाद पैदा हो जाता है तो उसे सुलझाने काक काम भी करता है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में जीवन बीमा व्यवसाय और सामान्य बीमा कारोबार का पूरा लेखा-जोखा भी रखता है। बीमा क्षेत्र में सक्रिय प्रोफेशनल ऑर्गनाइजेशन को बढ़ाने का काम भी करता है।

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आईआरडीए (IRDA) अध्यक्ष का कार्यकाल

आईआरडीए अध्यक्ष का कार्यकाल आमतौर पर 5 साल का होता है। 60 साल की उम्र तक वह इस पद पर बने रह सकते हैं। प्राधिकरण में पांच सदस्य भी होते हैं, जिनका कार्यकाल भी 5 साल से ज्यादा नहीं होता है। अलबत्ता वे 62 साल की उम्र तक काम कर सकते हैं। इसी तरह इसमें चार और सदस्य भी शामिल होते हैं, जो 5 साल से ज्यादा इस क्षेत्र में अपनी सेवा जारी नहीं रह सकते हैं। आईआरडीए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती है।

आईआरडीए एजेंट के परीक्षा का आयोजन

आईआरडीए “Insurance Regulatory and Development Authority/बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण” एलआईसी में बतौर एजेंट काम करने के लिए परीक्षा का आयोजन करती है। परीक्षा पास करने के बाद ही एजेंटों को एलआईसी में नियुक्त किया जाता है। परीक्षा के लिए आईआरडीए द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। इच्छुक भारत सरकार की ऑफीशियल वेबसाइट irdai.gov.in पर विजिट कर परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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आईआरडीए (IRDA) के तहत बीमा कंपनियों की निगरानी

आईआरडीए जहां एक तरफ बीमा कंपनियों और धारकों के लिए नीतियां बनाता है, वहीं दूसरी तरफ बीमा कंपनियों की नीतियों पर भी ध्यान देता है। आईआरडीए कंपनी और उसकी नीतियों, दोनों पर नजर रखता है। जरूरत पड़ने पर कंपनियों को उसकी नीतियों को लेकर तलब भी किया जा सकता है। बीमा उद्योग को नियंत्रित करने का काम भी किया जाता है, ताकि इसमें किसी तरह की अनियमितता न बरती जाए।

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Munendra Singh

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