बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) क्या होता है | Insurance Ombudsman in Hindi

बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) क्या है

बीमा लोकपाल आमतौर पर बीमा धारकों की रकम को सुरक्षित करने और बीमा कंपनियों पर निगरानी रखने का काम करते हैं। बीमा धारकों और कंपनियों के बीच पैदा हुए विवादों को सुलझाने के साथ दोनों के हितों को भी ध्यान में रखा जाता है। दोनों के पास एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करने का विकल्प है। इस आर्टिकल में बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इससे जुड़े सभी जरूरी तकनीकी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप इस आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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बीमा लोकपाल स्थापना कब हुई

बीमा परिषद की स्थापना शिकायतों का निपटान नियम 1988 के तहत की गई है। इसके तहत बीमा लोकपालों की नियुक्ति की गई है। बीमा लोकपाल सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं और वे पॉलिसी के संदर्भ में भुगतान की गई या की जाने वाली प्रीमियम राशि से संबंधित विवादों को सुलझाते हैं। दावों के अनुसार निपटान में देरी, प्रीमियम की प्राप्ति के बाद ग्राहकों को दस्तावेज जारी न करने आदि मामलों को लेकर बीमा लोकपाल से शिकायत की जा सकती है।

बीमा लोकपाल की नियुक्ति

देश भर में फिलहाल 17 बीमा लोकपाल हैं। नोएडा, पटना, पुणे, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, कोच्चि, जयपुर, हैदराबाद, गुवाहाटी, दिल्ली, चेन्नई, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, भोपाल, बंगलूरू, अहमदाबाद आदि शहरों में मौजूद बीमा लोकपाल देश में मौजूद सभी तरह की बीमा कंपनियों की निगरानी कर रहे हैं। उनके द्वारा समय-समय पर गाइडलाइन भी जारी की जाती है, जिसमें ग्राहकों के साथ किसी भी तरह के विवाद न करने की सलाह दी जाती है। बीमा कंपनियों को निर्देश दिया जाता है कि वे सरकार और आरबीआई के नियमों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी पर काम करें।

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बीमा कंपनियों शिकायत कब करें

ग्राहक बीमा कंपनियों की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं। अगर कंपनी द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसकी शिकायत बीमा लोकपाल से की जा सकती है। हालांकि ग्राहकों को पहले कंपनी की हाई अथॉरिटी तक अपनी बात पहुंचानी चाहिए। इसके लिए करीब एक महीने तक इंतजार करना चाहिए। इसके बाद भी अगर कंपनी द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया गया तो फिर ग्राहक बीमा लोकपाल से शिकायत करने के लिए आजाद हैं। यहां एक बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि व्ययों सहित दावे का मूल्य 30 लाख रुपये से अधिक न हो।

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बीमा लोकपाल से किन मामलों में करें शिकायत

बीमा लोकपाल से कई मामलों में शिकायत की जा सकती है। किसी बीमाकर्ता द्वारा दावों का आंशिक या पूर्ण अस्वीकरण पर भी शिकायत की जा सकती है। इसी तरह चुकता प्रीमियम या पॉलिसी की शर्तों के अनुसार प्रीमियम के बारे में विवाद पैदा होने पर भी बीमा लोकपाल से शिकायत की जा सकती है। दावों के संबंध में पॉलिसियों की विधिक संरचना, दावों में निपटान में विलंब को लेकर भी शिकायत की जा सकती है। इस तरह के कई मामले हैं, जिनपर विवाद बढ़ने के बाद ग्राहक किसी भी बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत के बाद क्या होगा

ग्राहकों द्वारा बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद बीमा लोकपाल इसकी जांच करते हैं। शिकायत स्वीकार होने के बाद बीमा लोकपाल द्वारा संबंधित कंपनी को सूचित किया जाता है। कंपनी को 15 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करने का समय दिया जाता है। विवादों के तथ्यों के आधार पर एक निष्पक्ष अनुशंसा प्रस्तुत किया जाता है। इसी तरह शिकायत प्राप्त करने के तीन महीने के बाद बीमा लोकपाल द्वारा अधिनिर्णय पारित किया जाता है। यह बीमा कंपनी पर बाध्यकारी होता है। लोकपाल किसी अनुग्रह अदायगी का भी अधिनिर्णय दे सकता है।

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बीमा लोकपाल से शिकायत कैसे करें

एजेंट कई बार गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेच देते हैं। ग्राहक इस स्थिति में कंपनी के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने ग्राहकों के लिए ऐसे प्रावधान किए हैं, जिनके तहत बीमा कंपनियों के खिलाफ शिकायत की जा सकती है। हालांकि ग्राहकों को सबसे पहले कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी (जीआरओ) से शिकायत करनी चाहिए। लिखित शिकायत देकर समस्या का समाधान निकालने के लिए कहा जा सकता है। जीआरओ निश्चित समय-सीमा के अंदर लोगों की शिकायत दूर करने की कोशिश करते हैं।

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इरडा से संपर्क कब करें

ग्राहकों को अगर 15 दिन में कंपनी द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता तो फिर इरडा से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले टोल फ्री नंबर 155255 पर संपर्क करें। इसके बाद इरडा की ऑफीशियल वेबसाइट irdai.gov.in पर ई-मेल के जरिए भी शिकायत भेजी जा सकती है। वेबसाइट पर संबंधित बीमा लोकपाल का पता भी दर्ज होता है। ग्राहक इस पते पर शिकायती पत्र भेज सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद लिखित रेफरेंस नंबर लेना जरूरी है। ऐसा करने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। आईजीएमएस के माध्यम से शिकायत करने पर इसका समाधान होने तक इस ट्रै करना बहुत आसान है।

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Munendra Singh

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