ग्रामीण बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक क्या है | देश में कुल ग्रामीण बैंक की सूची की जानकारी [लिस्ट डाउनलोड]

GRAMIN BANK AND Kshetriya Gramin Bank

भारत में बड़ी संख्या में ग्रामीण या फिर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक हैं। अलग-अलग राज्यों के ज्यादातर गांवों में स्थिति ग्रामीण बैंकों की वजह से लोगों को काफी सहूलियत मिली है। शहरी इलाकों में मौजूद कामर्शियल बैंकों पर उनकी निर्भरता कम हुई है। इस आर्टिकल में ग्रामीण बैंक के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बैंकों के उद्देश्य, फायदे और उनकी संख्या की जानकारी भी दी जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं।

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ग्रामीण बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना कब हुई थी

ग्रामीण या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना 1975 में हुई थी। भारत में सिर्फ पांच शहरों में इनकी स्थापना की गई थी। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और गोरखपुर, हरियाणा के शिवानी, राजस्थान के जयपुर और पश्चिम बंगाल के माल्वा जिले में स्थापित किए गए ग्रामीण बैंकों का दायरा तेजी के साथ बढ़ता चला गया है।

ग्रामीण बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक किन बैंकों के साथ शुरुआत की थी

शुरुआत में ग्रामीण या क्षेत्रीण ग्रामीण बैंकों के रूप में सिंडीकेट बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, युनाइटेड कामर्शियल बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शाखाएं खोली गई थी। बाद में दूसरे बैंकों को भी ग्रामीण बैंक के रूप में स्थापित किया गया। मौजूदा दौर में लगभग सभी राष्ट्रीय बैंकों की शाखाएं ग्रामीण इलाकों में मौजूद हैं। वे ग्रामीण बैंक के रूप में भी अपनी सेवा दे रहे हैं।

ग्रामीण बैंकों का उद्देश्य

भारत में जब बैंकों की स्थापना का सिलसिला शुरू हुआ था तो यह सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित थे। इसके बाद इनकी शाखाएं मध्यम और छोटे शहरों में भी खुलने लगी। बावजूद इसके ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिल रहा था। इसको ध्यान में रखते हुए ग्रामीण इलाकों में बैंकों की स्थापना का सिलसिला शुरू हुआ। गांव के लोग बैंकों के साथ अपना जुड़ाव महसूस कर सकें, इसके लिए उन्हें ग्रामीण बैंक का ही नाम दिया गया। गांव के लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए ही ग्रामीण या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसका दायरा तेजी के साथ बढ़ रहा है।

ग्रामीण बैंक का जिले में 25 शाखाएं हो सकती हैं

ग्रामीण बैंकों की शाखा विस्तार कार्यक्रम के तहत मानदंड भी तय किए गए हैं। सभी राष्ट्रीय बैंकों के लिए जरूरी है कि वे ग्रामीण इलाकों में अपनी शाखाएं खोलें। किसी भी एक बैंक के लिए एक जिले में कम से कम 25 ग्रामीण बैंकों की स्थापना जरूरी है। एक से ज्यादा जिला होने पर 40 से ज्यादा शाखाएं खोली जा सकती हैं। भारत में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा ग्रामीण बैंक हैं।

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नाबार्ड बैंक के पास जिम्मेदारी

भारत में 1975 में ग्रामीण बैंकों की स्थापना का सिलिसला शुरू होने के साथ ही इसे नियंत्रित करने का काम भी शुरू हो गया था। 1982 में नाबार्ड को ग्रामीण बैंकों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई। नाबार्ड ग्रामीण बैंकों की निगरानी तो करता ही है, उसे भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस पर अमल करते हुए नियंत्रित भी करता है। नाबार्ड द्वारा बैंक लोन से लेकर लेने-देन तक पर निगाह रखी जाती है।

GRAMIN BANK 9 सदस्यीय सिस्टम पर आधारित है

ग्रामीण बैंकों की स्थापना के साथ नियम और कायदे भी बनाए गए हैं। आरबीआई की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक ग्रामीण बैंकों की एक शाखा में कम से कम 9 कर्मचारी होंगे, जिसमें मैनेजर से लेकर चपरासी तक शामिल हैं। लोगों को लेन-देन में किसी तरह की दिक्क्तों का सामना न करना पड़े, इसके लिए काउंटर पर नियमित रूप से कर्मचारियों की तैनाती जरूरी है।

GRAMIN BANK की 20 हजार से ज्यादा शाखाएं

भारत में ग्रामीण या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। 1975 में पांच बैंकों की स्थापना के साथ शुरू हुआ सिलसिला अब बहुत बढ़ गया है। 1997 में क्षेत्रीय बैंकों की कुल शाखाएं करीब 14 हजार थी, जो 2007 में अब बढ़कर 15 हजार हो गई थी। मौजूदा दौर में भारत में 20 हजार से ज्यादा ग्रामीण बैंकों की शाखाए हैं, जहां हर रोज बड़ी संख्या में लेन-देन किया जा रहा है।

 ग्रामीणों के लिए GRAMIN BANK द्वारा होम लोन की व्यवस्था

ग्रामीणों के लिए लोन की व्यवस्था भी की गई है। गांव में रहने वालों को अभी तक मकान के निर्माण आदि के लिए लोन नहीं मिलता था, लेकिन यह व्यवस्था अब खत्म हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका एलान किया है। नई बैंक पॉलिसी के तहत अब ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को भी होम लोन मिल सकेगा। ग्रामीण बैंकों को इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। सरकार की नई नीति की वजह से ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को काफी राहत मिली है।

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Munendra Singh

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