फाइनेंशियल प्लानिंग क्या है | Financial Planning Explained in Hindi

फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) क्या है

फाइनेंशियल प्लानिंग हर किसी के लिए जरूरी है। इनकम के लिमिटेड सोर्स, बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति और दिनोंदिन बढ़ते गैर जरूरी खर्च को ध्यान में रखते हुए फाइनेंशियल प्लानिंग एक अच्छा स्टेप हो सकता है। लोग ऐसा कर बेजा खर्च को कंट्रोल में तो कर ही सकते हैं, इसके जरिए पैसों का सही इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इस आर्टिकल में फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) यानी वित्तीय नियोजन के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। फाइनेंशियल प्लानिंग क्या है और यह किस तरह की जा सकती है, इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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फाइनेंशियल प्लानिंग का मुख्य उद्देश्य

यहां यह सवाल खड़ा होता है कि फाइनेंशियल प्लानिंग आखिर क्यों जरूरी है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है? दरअसल फाइनेंशियल प्लानिंग आमतौर पर तीन मुख्य चीजों को ध्यान में रखकर की जाती है। इसका मकसद अपना घर खरीदना हो सकता है। बच्चों की हॉयर एजूकेशन की खातिर भी फाइनेंशियल प्लानिंग की जा सकती है। इसी तरह रिटायरमेंट और दूसरी कई चीजों को ध्यान में रखकर भी ऐसा किया जाता है। कुलमिलाकर फाइनेंशियल प्लानिंग एक अच्छा स्टेप है और ज्यादातर लोगों को इसकी वजह से फायदा भी मिल रहा है।   

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए वेजों को तैयार करें

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए सिर्फ आईडिया से काम नहीं चलेगा। इसके लिए जरूरी और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी। यानी सबकुछ रिटर्न में होना चाहिए। लोग भी जो भी खर्च करते हैं, उसका पूरा लेखा-जोखा उनके पास होना चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए। कागज पर सभी तरह के निवेश लिखने के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग आसानी के साथ की जा सकती है।

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फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए छोटी अवधि के लक्ष्य क्या हैं

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए छोटी अवधि के लक्ष्यों की जानकारी होनी चाहिए। वित्तीय लक्ष्य निर्धारित न होने की वजह से निवेश आमतौर पर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं। वित्तीय लक्ष्य को भी लिखना चाहिए। अगर लक्ष्य और उनके लिए जुटाई गई रकम को निकाला नहीं गया है तो पर्याप्त खर्च के बारे में पता नहीं चलेगा। इसके लिए इमरजेंसी फंड की जरूरत भी पड़ती है। सभी व्यक्ति को एक इमरजेंसी फंड तैयार करना चाहिए। अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा करने पर निवेश को भुनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है

बीमारी कब आएगी, वह कितनी बड़ी होगी, यह कोई नहीं जानता है। मिडिल क्लास के लिए अचानक आई बड़ी बीमारी से निपट पाना बहुत मुश्किल है। उनका बजट ऐसा नहीं होता है कि इसके लिए जरूरी खर्च का इंतजाम किया जा सके। इसलिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है। लोगों को हेल्थ, लाइफ और अपने एसेट का इंश्यारेंस भी जरूर करा लेना चाहिए। एसेट का इंश्यारेंस कराने पर अचानक पहुंचे नुकसान की भरपाई हो सकती है। दुर्घटना और आपदा की स्थिति में इसका असर लोगों के निवेश पर कम पड़ता है।

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निवेश के साथ महंगाई को शामिल करें

लोग निवेश तो करते हैं, लेकिन इसमें महंगाई को शामिल नहीं करते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति ने प्रति माह 5 हजार रुपये के साथ एक साल तक निवेश किया है तो उसे अगले साल ज्यादातर चीजों के दाम में बढ़ोतरी होने का अंदाजा भी होना चाहिए। लिहाजा शिक्षा, यात्रा, घर का निर्माण, शादी वगैरह जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बचत की रकम में महंगाई को शामिल करना चाहिए। ऐसा करने की वजह से बचत का वास्तविक आंकड़ा निकालने में मदद मिलती है।

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए स्कीम और प्रोडक्ट को चुनें

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए स्कीम और प्रोडक्ट का चयन कर लेना चाहिए। रिटायरमेंट को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह लंबी अवधि के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक है। एक्सपर्ट मानते हैं कि निवेश शुरू करते समय रिटायरमेंट को पहले लक्ष्य के तौर पर ध्यान में रखना चाहिए। यह सिर्फ सरकारी या फिर प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि कारोबार से जुड़े व्यक्ति के लिए भी जरूरी है। छोटे-छोटे व्यवसाय से जुड़े लोगों को वृद्धा अवस्था के बारे में सोचना चाहिए।

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निवेशकों के लिए एस्टेट प्लानिंग जरूरी है

निवेशकों को फाइनेंशियल प्लानिंग के तहत एस्टेट प्लानिंग भी करनी चाहिए। परिवार के सदस्यों को इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। यानी उन्हें वसीयत, पावर ऑफ अटार्नी, फैमिली ट्रस्ट के बारे में मालूम होना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने नॉमिनी के लिए दस्तावेज तैयार नहीं किए हैं तो उन्हें विरासत को पाने में तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर किसी भी व्यक्ति के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग का कोई मतलब नहीं रह जाता है। निवेश भी कोई मायने नहीं रखता है। गौरतलब है कि इस तरह की तमाम चीजों को ध्यान में रखते हुए फाइनेंशियल प्लानिंग यानी वित्तीय नियोजन किया जा सकता है।

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Munendra Singh

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