फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) क्या है | FATF (एफएटीएफ) Full Form in Hindi

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) आमतौर पर कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देने वाले देशों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक तो लगाता ही है, आर्थिक पैकेज को गैर कानूनी तरीके से इस्तेमाल करने वाले देशों को ब्लैक लिस्ट में भी डालता है। इस आर्टिकल में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। एफएटीएफ के कार्य क्षेत्र और क्षमता से जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

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एफएटीएफ (FATF) शुरुआत कब हुई

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) एक अंतर सरकारी संस्था है। इसका गठन 1989 में किया गया था। इस संस्था को सभी देशों की मंजूरी प्राप्त है। ज्यादातर मान्यताप्राप्त संगठनों ने भी इसको अपने स्तर पर काम करने की मंजूरी दी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) हो, विश्व बैंक या फिर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ), सभी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की सिफारिशों पर अमल करते हैं और उसके सुझाव को भी मानते हैं।

एफएटीएफ का मुख्यालय कहाँ है

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का मुख्यालय यूरोपीय देश फ्रांस के पेरिस शहर में है। संस्था के कारिंदे आमतौर पर दुनिया के उन देशों का दौरा करते हैं, जहां आंतकवादी घटनाओं में इजाफा हो रहा है। किसी सरकार द्वारा कथित रूप से गैर कानूनी कामों को बढ़ावा देने के मामले को भी गंभीरता से लिया जाता है। इसके लिए जांच दल उस देश में पहुंचकर इस तरह के मामलों को जड़ तक खंगालने का काम करते हैं। इसके अलावा ज्यादातर ऑफीशियल वर्क मुख्यालय में ही पूरे किए जाते हैं।  

एफएटीएफ (FATF) की ग्रे लिस्ट क्या है

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एक ग्रे या ब्लैक लिस्ट है। इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जहां आतंकवादी घटनाओं में इजाफा होने के साथ ही इस मामले में सरकारों की भूमिका भी संदिग्ध पाई जाती है। यानी ऐसे देश, जो अपने यहां आंतकवादी संगठनों को बढ़ावा देने का काम करते हैं, उन्हें इस लिस्ट में डाला जाता है। एशियाई उपमहाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा देश है, जो फिलहाल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल है। इसके अलावा उन देशों को भी इस लिस्ट में शामिल किया जाता है, जो अपने यहां गैर कानूनी कामों को बढ़ावा दे रहे हैं।

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ग्रे लिस्ट का प्रभाव

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट, जिसे आमतौर पर ब्लैक लिस्ट भी कहा जाता है, का प्रभाव है। अगर किसी देश का नाम इस लिस्ट के साथ जुड़ गया है तो फिर उसे विश्व बैंक से मिलने वाले आर्थिक पैकेज पर रोक लग जाती है। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी आर्थिक मदद या कर्ज देने पर रोक लगा देता है। यानी उसे मिलने वाली आर्थिक मदद रुक जाती है और देश को तमाम तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से भी इस तरह के देशों दी जा रही आर्थिक मदद पर रोक लगा दी जाती है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उदेश्य

किसी भी देश को ग्रे लिस्ट में डालने का उद्देश्य साफ है। एएफटीएफ आतंकवादी संगठनों और गैर कानूनी कामों को बढ़ावा देने वाले देशों को इसके जरिए कड़ा संदेश देता है। दुनिया के सभी देश जानते हैं कि अगर उनका नाम फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल हो गया तो फिर उनके लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज लेना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वे इसकी पूरी कोशिश करते हैं कि आतंकवादी संगठन उनकी जमीन का इस्तेमाल न करने पाए।

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FATF के तहत आंतकवादी संगठनों पर कार्रवाई

आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देने के लिए बुरी तरह से बदनाम हो चुके देशों के लिए अपनी छवि सुधारना मुश्किल हो गया है। हालांकि वे इसकी पूरी कोशिश करते हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को दिखाने के लिए वे अपने यहां एक्टिव आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई भी करते हैं। उन्हें बैन करते हैं। फंडिंग रोकते हैं, लेकिन एफएटीएफ इस तरह की सभी ग्राउंड रिपोर्ट से वाकिफ होता है। इसके लिए वह अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, इजरायल जैसी दुनिया की ज्यादातर बड़ी एजेंसियों द्वारा मिलने वाले फीड बैक पर भी काम करता है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ी

भारतीय उपमहाद्वीप में पाकिस्तान इकलौता ऐसा देश है, जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल है। फरवरी, 2020 में उसे उम्मीद थी कि वह इस लिस्ट से बाहर आ जाएगा। पाकिस्तान ने इसके लिए हाफिज सईद के संगठन पर बैन लगा दिया था। उसके सभी बैंक अकाउंट को सीज कर दिया गया था। दूसरे संगठनों से मिलने वाली फंडिंग पर भी रोक लगा दी गई थी। बावजूद इसके पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका है। इसकी वजह से आईएमएफ से मिलने वाला कर्ज भी रुक गया है।

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Munendra Singh

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