ईएलएसएस (ELSS) योजना क्या है | फुल फॉर्म – ELSS के बारे में जानकारी

ईएलएसएस (ELSS) योजना क्या होता है

अगर आप टैक्स बेनिफिट चाहते हैं तो ईएलएसएस स्कीम में निवेश कर सकते हैं। भारत में आमतौर पर ज्यादातर लोग टैक्स में छूट पाने के लिए ही इस तरह की स्कीमों में निवेश करते हैं। निवेश के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस आर्टिकल में ईएलएसएस योजना के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। स्कीम के तहत टैक्स में किस स्तर पर छूट मिल सकती है, इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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ईएलएसएस (ELSS) का फुलफार्म

ईएलएसएस का फुलफार्म “(Equity Linked Savings Scheme) इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम” है। कुछ म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश करने पर आयकर कानून के आर्टिकल 80 के तहत टैक्स में छूट दिए जाने का प्रावधान है। ईएलएसएस भी इसमें शामिल है। टैक्स सेविंग को ध्यान में रखते हुए ही इसे डिजाइन किया गया है। हालांकि आरबीआई और संबंधित गवर्निंग बॉडी ने इसके लिए जरूरी शर्तों को भी लागू किया है। लोगों को इस तरह की स्कीमों में निवेश के जरिए टैक्स में छूट पाने के लिए नियमों का पालन करना होगा।

ईएलएसएस के तहत डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर छूट

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएसएलएल) के तहत वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट हासिल की जा सकती है। हालांकि नियमों के तहत अगर कोई व्यक्ति स्कीमों में डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा निवेश करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। इसके लिए भी प्रावधान किया गया है। यही नहीं, एकमुश्त की बजाय मासिक सिप के जरिए भी निवेश किया जा सकता है। निवेशक ज्यादा पैसा बनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं। उनके लिए नियमों में छूट दी गई है।

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म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश के लिए केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा

म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश के लिए केवाईसी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। अगर कोई व्यक्ति केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा कर चुका है तो फिर वह पेमेंट इंस्ट्रूमेंट के साथ फिजिकल फार्म भर सकते हैं। यानी लोग ऑफलाइन प्रक्रिया के साथ भी इस तरह की स्कीमों में निवेश कर सकते हैं। उन्हें इसके लिए एक फार्म भरना होगा। फार्म पर सभी जरूरी जानकारी दर्ज करने के बाद उसे जमा कर सकते हैं। फार्म के साथ संबंधित दस्तावेजों को भी अटैच करना होगा।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के तहत ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएसएलएल) में निवेश के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया को भी अपनाया जा सकता है। निवेशकों को इसके लिए वित्तीय संस्थानों की ऑफीशियल वेबसाइट पर विजिट करना होगा। यहां ऑनलाइन फार्म भरने के बाद ईएसएलएल योजना में निवेश किया जा सकता है। लोग अपनी पसंद के फंड में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। यहां केवाईसी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि वित्तीय संस्थानों से जुड़े सभी निवेशकों के पास केवाईसी नंबर पहले से ही होता है। सेंट्रल केवाईसी के तहत उनकी पहचान स्पष्ट हो चुकी है।

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ईएलएसएस में निवेश के लिए कट-ऑफ टाइमिंग का ध्यान रखें

ईएलएसएस में निवेश के लिए कट-ऑफ टाइमिंग का ध्यान रखना होगा। अगर दो लाख रुपये से कम सभी एप्लीकेशन 3 बजे से पहले होते हैं, तो उसी दिन की एनएवी लागू होगी। अगर पैसों को 3 बजे के बाद जमा किया जाता है तो फिर अगले दिन की एनएवी लागू होगी। इसी तरह दो लाख रुपये से ज्यादा के एप्लीकेशन के लिए एनएवी तभी लागू होगी, जब पैसा फंड हाउस के खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। इस तरह कट-ऑफ टाइमिंग का ध्यान रखकर निवेश को और फायदेमंद बनाया जा सकता है।

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Equity Linked Savings Scheme के तहत तीन साल की लॉक-इन अवधि

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएसएलएल) में निवेश के लिए कायदे और कानून का पालन करना होगा। इसमें लॉक-इन की अवधि है। यह अवधि कम से कम 3 साल की होती है। अगर कोई निवेशक इस अवधि के दौरान स्कीम से पैसा निकालने की कोशिश करता है तो वह कामयाब नहीं होगा। लॉक-इन अविध के दौरान स्कीम से पैसा निकालने या फिर इसमें से स्विच करने की अनुमति नहीं है। इसलिए ईएसएलएल योजनाओं में पैसा लगाने से पहले नियमों की जानकारी जुटा लेना चाहिए।

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ईएसएलएल के जरिए हर वित्तीय वर्ष में निवेश करना होगा

ईएसएलएल स्कीमों में निवेश के जरिए टैक्स में छूट पाने के लिए लोगों को हर वित्तीय वर्ष में निवेश करना होगा। सिर्फ एक बार निवेश करने की वजह से टैक्स में बार-बार छूट नहीं मिल सकती है। निवेशक वित्तीय वर्ष में कम से कम डेढ़ लाख रुपये तक लगा सकते हैं। अगर इससे ज्यादा का निवेश करना चाहते हैं तो उन्हें सभी क्लॉज को पूरा करना होगा। इसके बाद ही टैक्स में ज्यादा छूट हासिल की जा सकती है।

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Munendra Singh

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