सेंसेक्स और निफ्टी क्या होता है | Difference & Meanning – Sensex, NIFTY in Hindi

सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (NIFTY) क्या है

सेंसेक्स और निफ्टी, भारत में ये दोनों टर्मनोलॉजी कारगर हैं। दोनों को भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ भी जोड़ कर देखा जाता है। दोनों के घटने-बढ़ने से बाजार की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। इस आर्टिकल में सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। दोनों के बीच मुख्य रूप से क्या अंतर है, इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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सेंसेक्स (Sensex) क्या है

भारत में सेंसेक्स की शुरुआत 1986 में हुई थी। यह बॉंबे स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स है। सेंसेक्स में आमतौर पर 30 बड़ी कंपनियां शामिल होती हैं। कंपनियां बदलती रहती हैं। उनके चयन के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी नियमों को ध्यान में रखकर कंपनियों का चयन करती हैं। सेंसेक्स को एक तरह के पैरामीटर की तरह देखा जाता है। यह एक पैमाना है बाजार की स्थिति को समझने के लिए। सेंसेक्स के घटने-बढ़ने से यह आसानी के साथ समझ में आता है कि कंपनियों को फायदा हो रहा है या फिर नुकसान।  

भारतीय बाजार का सूचकांक है

स्टॉक मार्केट एक ऐसा बाजार है, जहां सीधे तौर पर किसी भी तरह के सामान को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है। यहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। इसलिए इसे शेयर मार्केट कहते हैं। शेयरों को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया में दलाल शामिल होते हैं। दलाल के बिना आमतौर पर शेयर को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता है। सेंसेक्स को भारतीय बाजार का सूचकांक भी कहा जाता है। सेंसेक्स गिरने या बढ़ने से कंपनियों के फायदे या नुकसान समझ में आते हैं। बाजार की हकीकत का पता भी चल जाता है। इसके बाद शेयर को खरीदने और बेचने में सहूलियत भी मिलती है।

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सेंसेक्स (Sensex) की गणना कैसे करते हैं

सेंसेक्स का बेस ईयर 1978-79 है। जबिक बेस वैल्यू 100 है। सेंसेक्स को मार्केट कैप और बेस वैल्यू के साथ कैलकुलेट किया जाता है। शुरुआत में सेंसेक्स को 100 प्लाइंट के साथ इसलिए शुरू किया गया था, ताकि गणना में आसानी हो। उदाहरण के तौर पर अगर शेयर मार्केट का कारोबार 10 फीसदी बढ़ता है तो सेंसेक्स का प्वाइंट 10 प्रतिशत से बढ़कर 110 तक पहुंच जाएगा। अगर किसी कंपनी का प्रदर्शन बेहतर है, तो उसके शेयर की कीमत बढ़ जाती है।

निफ्टी (NIFTY) क्या है

निफ्टी की शुरुआत 1994 में हुई थी। यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स है। निफ्टी में आमतौर पर 50 कंपनियां शामिल होती हैं। कंपनियों का चयन अलग-अलग सेक्टरों से किया जाता है। निफ्टी के घटने-बढ़ने की वजह से भी बाजार की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। कंपनियों के फायदे और नुकसान का आकलन भी किया जा सकता है। इसे निफ्टी-50 के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि इसमें 50 कंपनियां शामिल हैं, इसलिए इसके साथ इस टर्मनोलॉजी को भी जोड़ दिया गया है।

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निफ्टी (NIFTY) की गणना कैसे करते हैं

निफ्टी की गणना के लिए उसके बेस ईयर 1995 और आधार वैल्यू 1000 का उपयोग किया जाता है। गणना में देश के 12 अलग-अलग सेक्टर से 50 से अधिक बड़ी कंपनियों को चुना जाता है। इस तरह यह समझा जा सकता है कि निफ्टी की गणना के लिए आमतौर पर सेंसेक्स की गणना में उपयोग किए जाने वाली पद्धति का ही इस्तेमाल किया जाता है। कुछ टर्म बदल जाते हैं, जिनका जिक्र ऊपर किया जा चुका है।

Difference Between Sensex and Nifty

सेंसेक्स और निफ्टी के बीच मामूली अंतर है। सेंसेक्स मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, जबकि निफ्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स है। सेंसेक्स में 30 बड़ी कंपनियों को शामिल किया गया है, जबकि निफ्टी में 50 कंपनियों को जगह दी गई है। सेंसेक्स का बेस ईयर 1978-79 है, जबकि निफ्टी का बेस ईयर 1995 है। दोनों भारती की बड़ी कंपनियों की आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हैं। भारतीय बाजार में दोनों की वैल्यू है और दोनों से जुड़ी खबरों को हाईलाइट किया जाता है।

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सेंसेक्स और निफ्टी से रजिस्टर्ड कंपनियां

मुंबई शेयर बाजार में लगभग 5500 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। हालांकि सभी को इंडेक्स नहीं किया जाता है। जिन कंपनियों का प्रदर्शन बहुत अच्छा होता है, उन्हें सेंसेक्स में शामिल किया जाता है। निफ्टी भी प्रदर्शन के आधार पर ही कंपनियों को इंडेक्स करती हैं। कंपनियों के प्रदर्शन की समीक्षा भी की जाती है। खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को सूची से बाहर कर, बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को इंडेक्स कर दिया जाता है।

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Munendra Singh

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