लिक्विड फण्ड, डेब्ट फण्ड क्या है | Difference Between Liquid Funds vs Debt Funds in Hindi

लिक्विड और डेब्ट फंड (Liquid Funds & Debt Funds) क्या है

लिक्विड फंड में पैसा रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह सेविंग बैंक अकाउंट की तुलना में ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं। लिक्विड फंड चूंकि म्यूचुअल फंड की डेट कैटिगरी में आते हैं, इसलिए इसमें लिक्विडिटी की समस्या भी नहीं है। लोग अपनी मर्जी और जरूरत के हिसाब से कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। इस आर्टिकल में लिक्विड और डेब्ट फंड (Liquid Funds & Debt Funds) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। दोनों फंडों के तकनीकी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

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लिक्विड फंड (Liquid Fund) क्या है

लिक्विड फंड की स्कीमें मार्केट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करती हैं। निवेश आमतौर पर छोटी अवधि के लिए किया जाता है। इसमें ट्रेजरी बिल, कॉल मनी और सरकारी प्रतिभूतियां शामिल हैं। लिक्विड फंड म्यूचुअल फंड की डेट कैटिगरी में आते हैं। इसमें सेविंग बैंक अकाउंट की तुलना में थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिलता है, जिसकी वजह से लिक्विड फंड की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इसका इस्तेमाल छोटी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। यह छोटी अवधिक एक दिन से लेकर छह महीने तक की हो सकती है।

लिक्विड फंड के पैसे को आसानी से भुना सकते हैं

लिक्विड फंड की सबसे खास बात यह है कि इसमें लिक्विडिटी की समस्या नहीं है। यानी दूसरी कई स्कीमों की तरह इसमें आपके पैसे फंसते नहीं है। पैसे निकालने के लिए किसी तरह की बंदिश नहीं है। निवेशक जब चाहे अपने पैसे निकाल सकते हैं। यह पैसा लोगों के बैंक खाते में अगले दिन ही पहुंच जाता है। फंड हाउस ने किसी तरह की एंट्री या एक्जिट लोड नहीं रखा है। यहां एक बात और ध्यान देने वाली यह है कि बैंकों में बचत खाते पर करीब 3.5 फीसदी तक रिटर्न मिलता है, जबकि लिक्विड फंडों की कैटिगरी ने पिछले एक साल में करीब 6.90 फीसदी के साथ रिटर्न दिया है।

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लिक्विड फंडों में निवेश करना ज्यादा जोखिम नहीं है

लिक्विड फंडों में निवेश करने को आमतौर पर ज्यादा जोखिमभरा नहीं माना जाता है। इसकी वजह यह है कि यह फंड सामान्य तौर पर ज्यादा क्रेडिट रेटिंग वाले इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं। इस तरह के फंडों की नेट एसेट वैल्यू बदलती रहती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंस्ट्रूमेंट के जरिए मिलने वाला ब्याज कितना है। यही वजह है कि लिक्विड फंडों में अस्थिरता कम होती है। इसमें ज्यादा जोखिम नहीं है। अलबत्ता छोटी अवधि वाली स्कीमों पर निवेश करना चाहिए।

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लिक्विड फंडों की स्कीम टैक्स के दायरे में होता है

लिक्विड फंडों की स्कीमों पर आमतौर पर टैक्स में छूट नहीं है। फंडों को तीन साल से ज्यादा वक्त तक रखने पर लॉंग टर्म कैपिटल गेंस के रूप में टैक्स देना होगा। जबकि तीन साल से पहले इसे बेचने पर स्लैब के हिसाब से ही टैक्स देना होता है। अगर कोई व्यक्ति डिविडेंड विकल्प को चुनता है तो यह फंड 29.12 प्रतिशत के डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के दायरे में आएगा। कुलमिलाकर यह माना जा सकता है कि लिक्विड फंड की स्कीमों पर निवेश करने के बाद टैक्स में आमतौर पर किसी तरह की छूट नहीं मिलती है।

डेब्ट फंड (Debt Fund) क्या है

डेब्ट फंड आमतौर पर बॉंड्स और कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में इनवेस्ट करते हैं। इसके तहत कंपनी बॉंड, कॉरपोरेट एफडी और सरकारी बॉंड में निवेश किया जा सकता है। यही नहीं, इस फंड की खास बात यह है कि बचे हुए पैसों को इक्विटी में भी लगाया जा सकता है। यह संख्या 35 फीसदी तक हो सकती है। इसी तरह डेब्ट फंडों का पैसा आमतौर पर फिक्स्ड रिटर्न देने वाले बॉंड में लगाया जाता है। इसलिए यह एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है, जो कम जोखिम में लोगों को अच्छा लाभ हासिल करने का अवसर प्रदान करता है।

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सेविंग बैंक अकाउंट से ज्यादा रिटर्न

डेब्ट फंड की ज्यादातर स्कीमों में सेविंग बैंक अकाउंट की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिलता है। ओवरनाइट फंड या लिक्विड फंड को डेब्ट फंड के तहत बांटा जाता है। इस तरह के फंडों ने हमेशा अच्छा रिटर्न दिया है। लिक्विड फंड की तरह डेब्ट फंड की भी खासियत यही है कि इसमें आपके पैसे ब्लॉक नहीं होते हैं। अगर आपको पैसों की जरूरत है तो आप इसे बीच में ही निकाल सकते हैं। पैसा थोड़े समय में ही आपके बैंक अकाउंट में पहुंच जाएगा। यानी व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार यूनिट को कभी भी खरीद और बेच सकता है।

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फिक्स्ड रिटर्न की सुविधा

डेब्ट फंड भी उसी इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं, जहां फिक्स रिटर्न दिया जाता है। डेट फंड मुख्य रूप से सिक्योरिटी में निवेश करते हैं, जो निश्चित ब्याज देते हैं। इसमें रिटर्न की गारंटी होती है। इसी तरह डेब्ट फंड आमतौर पर खराब प्रदर्शन नहीं करता है। इसकी संभावना तब होती है, जब निवेशित सिक्योरिटी की क्रेडिट रेटिंग कम होती है। इस स्थिति में ब्याज दर की गति नकारात्मक हो जाती है। इस तरह के कई छोटे पहलुओं को छोड़ दिया जाए तो डेट फंड में निवेश करना सामान्य तौर पर फायदेमंद ही रहता है। 

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Munendra Singh

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