CRR, SLR, MSF क्या है | फुल फॉर्म | सीआरआर, एसएलआर, एमएसएफ के बारे में जानकारी

सीआरआर, एसएलआर, एमएसएफ क्या होता है

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भारत में कामर्शियल बैंकों को सुचारू रूप से संचालित करने और आर्थिक संकट के समय में उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं लागू की हैं। इन व्यवस्थाओं में सीआरआर, एसएलआर और एमएसएफ शामिल हैं। तीनों व्यवस्थाएं अलग-अलग नियमों और शर्तों के साथ काम करती हैं। इस आर्टिकल में सीआरआर, एसएलआर और एमएसएम के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। दरों में घटोतरी और बढ़ोतरी के नियम से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

ग्रामीण बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक क्या है | देश में कुल ग्रामीण बैंक की सूची की जानकारी [लिस्ट डाउनलोड]

सीआरआर (CRR) क्या है |CRR KA FULL FORM

सीआरआर (CRR) का फुल फार्म “Cash Reserve Ratio / नकद आरक्षित अनुपात” है। इसका संबंध कामर्शियल बैंकों के साथ है। बैंकों में जो भी राशि जमा होती है, उसका कुछ हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेजना होता है। सीआरआर भेजने के बाद बैंकों के पास जो भी रकम बचती है, उसे खाताधारकों के साथ लेन-देन, बैंक लोन, सरकारी स्कीमों या फिर दूसरे व्यवसाय के लिए खर्च किया जा सकता है।

सीआरआर (CRR) का दर

सीआरआर की दरों में समय के साथ परिवर्तन होता रहता है। हालांकि पिछले कुछ सालों से इसमें स्थिरता बनी हुई है। 2013 के बाद सीआरआर रेट 4 प्रतिशत की दर के साथ बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कामर्शियल बैंक के पास कुल 2 लाख रुपये हैं तो उसे 4 प्रतिशत की दर से आरबीआई को 8 हजार रुपये देना होगा। बाकी बचे हुए 1 लाख 92 हजार रुपये को बैंक अपने स्तर पर खर्च कर सकते हैं। इसमें खाताधारकों को लोन देना तो शामिल है ही, सरकारी योजनाओं पर भी पैसे लगाए जाते हैं। बैंक प्राइवेट कंपनियों के लिए भी पैसे खर्च करते हैं। 

सीआरआर (CRR) रेट बढ़ने से होती है मुश्किल

सीआरआर रेट हमेशा स्थिर नहीं रहती है। इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। 2011 में सीआरआर रेट करीब 6 प्रतिशत थी। 2012 में 5.50 और इसके बाद से 4 प्रतिशत पर बनी हुई है। इस तरह यह समझा जा सकता है कि सीआरआर दर जितनी ज्यादा होगी, बैंकों को निवेश या लोन वगैरह के लिए पैसे जारी करने में उतनी ज्यादा मुश्किल होती है। सीआरआर रेट कम होने पर बैंकों के लिए इसमें आसानी होती है। उन्हें कई तरह की छूट मिल सकती है।

एसएलआर (SLR) क्या है |SLR KA FULL FORM

एसएलआर (SLR) का फुल फार्म “Statutory Liquidity Ratio / वैधानिक तरलता अनुपात” है। इसका संबंध भी कामर्शियल बैंकों के साथ है। खासकर लोन जारी करने के मामले में एसएलआर को ध्यान में रखा जाता है। बैंकों को लोन के लिए पैसे जारी करने का अधिकार तो है, लेकिन इसके लिए उन्हें किसी भी तरह की सिक्यूरिटी रखने को कहा गया है। यह सिक्यूरिटी गोल्ड रिजर्व और जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेजों के रूप में हो सकती है। यानी खाताधारकों या ग्राहकों से सिक्यूरिटी प्रूफजमा कराने के बाद ही उन्हें लोन के लिए पैसे दिए जा सकते हैं।

SLR की सीमा कितने प्रतिशत तक होती है

भारत में एसएलआर की सीमा 40 प्रतिशत तक रह चुकी है। एसएलआर की सीमा तय करने का काम आरबीआई करता है। उसे यह भी अधिकार है कि वह बैंकों के एलएलआर को 40 प्रतिशत से घटाकर 0 कर दे। वास्तव में यह बाजार पर निर्भर है। खास बात यह है कि ज्यादातर कामर्शियल बैंक अपना एसएलआर भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस से ज्यादा ही रखते हैं। उदाहरण के तौर पर 2018 में आरबीआई ने 19.5 प्रतिशत एसएलआर तय किया था, जबकि बैंकों का एसएलआर उस वक्त 26 फीसदी के आसपास था।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है | RBI के कार्य | अधिकार | दिशा-निर्देशों की जानकारी

एसएलआर की दर क्या है

एसएलआर की दर भी बैंकों में प्रतिदिन जमा होने वाले रुपये की संख्या पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति ने बैंक में 1 हजार रुपये जमा किए तो बैंक को 20 प्रतिशत एसएलआर के हिसाब से आरबीआई को 200 रुपये देना होगा। बैंक एसएलआर के रूप में आरबीआई के पास जो भी रकम जमा कराते हैं, उसपर उन्हें ब्याज भी मिलता है। इस तरह बैंकों में जमा होने वाले पैसों की वजह से जहां एक तरफ आरबीआई को भी मजबूती मिलती है, वहीं दूसरी तरफ आरबीआई द्वारा कामर्शियल बैंकों की मदद भी की जाती है।

एमएसएफ (MSF) क्या है | MSF KA FULL FORM

एमएसएफ (MSF) का फुल फार्म “Marginal Standing Facility” है। यह भी बैंकिंग से ही संबंधित टर्म है। इसका संबंध भी आमतौर पर लोन के साथ है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कामर्शियल बैंकों को लोन के लिए पैसे जारी करने की छूट जरूर दी है, लेकिन इसके लिए कई तरह के नियम बनाए गए हैं, जिसका पालन करना बैंकों के लिए जरूरी है। नियमों को पूरा करने के बाद ही बैंक खाताधारकों को लोन की रकम अदा कर सकते हैं।

एमएसएफ (MSF) के तहत जमा राशि पर एक फीसदी ऋण

एमएसएफ के तहत बैंक कम से कम एक करोड़ रुपये का लोन हासिल कर सकते हैं। यानी बैंकों के पास जो भी जमा राशि है, उसपर एक फीसदी के हिसाब से ही लोन हासिल किया जा सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि आरबीआई बैंकों को आर्थिक संकट के समय में लोन जारी करता है। हालांकि एमएसएम रेट में बढ़ोतरी भी होती रहती है। इस कंडीशन में बैंकों के लिए लोन लेना मुश्किल हो जाता है।

एमएसएफ (MSF) का शुरुआत कब हुई थी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने फाइनेंशियल ईयर 2011-12 में पहली बार एमएसएफ का एलान किया था। यह मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू के तहत किया गया था। आरबीआई ने बाद में एमएसएफ रेट को 2 फीसदी तक कर दिया था। इसकी वजह से बैंकों को लोन की रकम हासिल करने में थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि डॉलर की तुलना में रुपया थोड़ा मजबूत हुआ था। सेट्टेबाजी रोकने के लिए भी ऐसा किया गया था। आरबीआई अब एमएसएफ रेट में 0.75 फीसदी घटाने का एलान किया है।

SBI Bank Employee Salary Structure | Clerk, PO, SO Pay Slip Download

Munendra Singh

Leave a Comment

%d bloggers like this: