कॉर्पोरेट टैक्स क्या होता है | गणना – Corporate tax Explained in Hindi

कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax) क्या है

कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों पर लगाया जाता है। प्राइवेट लिमिटेड, सूचीबद्ध और असूचीबद्ध, सभी तरह की छोटी-बड़ी कंपनियां कॉरपोरेट टैक्स के दायरे में आती हैं। कॉरपोरेट टैक्स के जरिए सरकार हर साल बड़े पैमाने पर रेवेन्यू को जनरेट करती है। यह सरकार के राजस्व का प्रमुख सोर्स है। इस आर्टिकल में कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। टैक्स की घटती-बढ़ती दरों और इसकी वजह से कंपनियों पर पड़ने वाले असर से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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कॉरपोरेट टैक्स को निगम या कंपनी कर भी कहते हैं

कॉरपोरेट टैक्स को निगम या कंपनी टैक्स भी कहा जाता है। सभी घरेलू कंपनियों के साथ नई फैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां भी कॉरपोरेट टैक्स के दायरे में आती हैं। केंद्र सरकार जब टैक्स की दरों को घटाती या बढ़ाती हैं तो यह आमतौर पर सभी पर लागू होता है। कॉरपोरेट टैक्स में छूट को बाजार में सकारात्मक तौर पर देखा जाता है। निवेशकों को इसकी वजह से काफी फायदा होता है। दलाल स्ट्रीट के निवेशक थोड़े समय में करोड़ों-अरबों रुपये की कमाई कर लेते हैं।

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कमाई पर लगता है टैक्स

भारत में जिस तरह एक रजिस्टर्ड कारोबारी को बिक्री के जरिए होने वाली कमाई पर सेल टैक्स देना होता है और सर्विस पेशा लोगों को अपनी कमाई पर सालाना इनकम टैक्स देना होता है, इसी तरह तमाम छोटी-बड़ी घरेलू और मैन्यूफैक्चिरंग कंपनियों को अपनी कमाई पर कॉरपोरेट टैक्स देना होता है। यानी अलग-अलग क्षेत्र के लिए अलग-अलग नामों के जरिए टैक्स वसूलने का सिस्टम है। इस तरह के सभी टैक्स वसूलने का काम केंद्र सरकार करती है। इसके लिए अलग-अलग विभागों की स्थापना की गई है, जो सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक टैक्स वसूलने का काम करते हैं।

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टैक्स की दरें क्या हैं

नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को 1 अक्तूबर, 2019 के बाद से 15 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स देना पड़ रहा है। इसमें सरचार्ज और सेस शामिल नहीं हैं। सरचार्ज और सेस को शामिल करने के बाद कॉरपोरेट टैक्स की दरें करीब 17.10 तक पहुंच जाएंगी। इस लिहाज से कंपनियों को अपनी कमाई का 17.10 फीसदी हिस्सा कॉरपोरेट टैक्स के रूप में देना पड़ रहा है। आर्थिक सुस्ती बढ़ने या फिर देश की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बाद कॉरपोरेट टैक्स को घटाया और बढ़ाया भी जाता है। आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार इस तरह के फैसले लेती हैं। हालांकि मौजूदा दौर में नए निवेशकों को 25 फीसदी की दर के साथ टैक्स देना पड़ रहा है।

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कॉरपोरेट टैक्स का कंपनियों पर क्या असर पड़ता है

किसी भी देश में जब कॉरपोरेट टैक्स में बढ़ोतरी की जाती है तो उसे नकारात्मक तौर पर देखा जाता है। निवेशकों को इसकी वजह से नुकसान होता है। मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए भी कारोबार करना मुश्किल हो जाता है। किसी भी देश की सरकारें कॉरपोरेट टैक्स को आमतौर पर उस वक्त बढ़ाती हैं, जब उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। लोगों के पास पैसे होते हैं। चीजों को खरीदने की उनकी क्षमता बढ़ी हुई होती है। इस स्थिति में कंपनियों को बढ़ी हुई दरों के साथ कॉरपोरेट टैक्स देने में खलता नहीं है, क्योंकि वे इसकी भरपाई बाजारों से कर लेती हैं।

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कॉरपोरेट टैक्स का बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव

कॉरपोरेट टैक्स में कमी का फायदा कंपनियों को सीधे तौर पर मिलता है। किसी भी देश की सरकारें आमतौर पर कॉरपोरेट टैक्स में उस कमी करती हैं, जब वहां आर्थिक सुस्ती नजर आती हैं। ऐसे में कंपनियों और निवेशकों को बूस्ट-अप करने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कमी की जाती है। बाजार पर इसका सकरात्मक असर पड़ता है। टैक्स की दरें घटने के बाद कंपनियां मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाती हैं। जॉब के लिए नए लोगों को हॉयर करती हैं। निवेशकों को भी इसकी वजह से फायदा होता है। वह कंपनियों के शेयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। सबसे ज्यादा फायदा नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को होता है, जो शुरुआत में ज्यादा टैक्स देने की ताकत नहीं रखती हैं।

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Munendra Singh

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