वाणिज्यिक पत्र (Commercial paper) क्या है | कमर्शियल पेपर की परिभाषा व अर्थ

Commercial Paper

वाणिज्य या कामर्शियल पेपर का इस्तेमाल आमतौर पर वित्तीय या फिर खासकर मुद्रा बाजार के लिए किया जाता है। अलग-अलग और छोटी-बड़ी कंपनियां कामर्शियल पेपर जारी करती हैं, जिनपर ब्याज के साथ रिटर्न दिया जाता है। यह एक सीमित अवधि के लिए होता है, जिसे कंपनी की शर्तों को मानते हुए आसानी के साथ हासिल किया जा सकता है। इस आर्टिकल में कामर्शियल पेपर के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसकी परिभाषा और मतलब को भी विस्तारित किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

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रेटिंग के बाद जारी कर सकते हैं, वाणिज्यिक पत्र

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कंपनियों द्वारा कामर्शियल पेपर जारी करने की प्रक्रिया पर नजर रखता है। इसके लिए कानून और कायदे भी बनाए गए हैं। कंपनियों को कामर्शियल पेपर जारी करने के लिए आरबीआई की गाइडलाइंस का पालन करना होता है। आरबीआई मान्यताप्राप्त या प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा रेटिंग कराने के बाद ही कंपनियों को कामर्शियल पेपर जारी करने की अनुमति देता है। आरबीआई की अनुमति के बिना कंपनियां वाणिज्य पेपर को जारी नहीं कर सकती हैं।

Commercial Paper होने पर ब्याज के साथ रिटर्न

कंपनियां कामर्शियल पेपर के जरिए निवेश करने वालों को ब्याज के साथ रिटर्न देती हैं। ब्याज की दरें वाणिज्य पत्रों की संख्या और उनकी अवधि पर निर्भर होती हैं। कामर्शियल पेपर को आमतौर पर एक महीने से लेकर छह महीने तक के लिए हासिल किया जा सकता है। वाणिज्य पत्रों की अवधि जितनी ज्यादा होगी, ब्याज की दरें भी उतनी ज्यादा होंगी। कंपनियां द्वारा हर यूनिट पर 100 रुपये लौटाने का वादा किया जाता है। निवेशकों को इसके लिए कंपनी को सभी जानकारी मुहैया कराना होता है।

कमर्शियल पेपर वाले निवेशकों को डिस्काउंट की व्यवस्था

कंपनियां निवेशकों के लिए डिस्काउंट की व्यवस्था भी करती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी यूनिट की कीमत 100 रुपये है तो ग्राहकों इसके लिए सिर्फ 90 देना होगा। इस तरह निवेशकों को यूनिट पर कम से कम 10 फीसदी का डिस्काउंट दिया जाता है। जबकि ज्यादातर कंपनियां इसके बदले निवेशकों को पूरे पैसे लौटाती हैं। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे पैसे लगाने से पहले कंपनियों के बारे में जानकारी जुटा लें। भरोसेमंद और प्रतिष्ठित कंपनियों में पैसे लगाना ज्यादा बेहतर होता है।

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वाणिज्य या कामर्शियल पेपर को बैंकों के जरिए भी खरीद सकते हैं

कंपनियां वाणिज्य या कामर्शियल पेपर को कई तरह से जारी करती हैं। आमतौर पर यह सीधे कंपनियां द्वारा जारी किया जाता है। कंपनियां कभी-कभी इसके लिए बैंकों और डीलरों का सहारा भी लेती हैं। बैंकों द्वारा जारी होने के बाद कंपनियों के कामर्शियल पेपर की अहमियत बढ़ जाती है। चूंकि निवेशकों के बीच बैंकों की क्रेडिबिलिटी ज्यादा है, इसलिए वे इसे एक तरह से गारंटी के रूप में भी देखते हैं। हालांकि बैंक इसके लिए कंपनियों के बिजनेस रिकार्ड को देखते हैं। रिकार्ड अच्छा होने के बाद ही बैंक आमतौर पर कंपनियों के कामर्शियल पेपर को जारी करने के लिए सहमति देते हैं।

Commercial Paper के तहत बाजार में निवेश का माध्यम है

आम लोगों या फिर निवेशकों के लिए यह पैसा लगाने का एक माध्यम है। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो बाजार में निवेश के लिए भरोसेमंद माध्यम तलाश करते हैं। कामर्शियल पेपर उनकी इस उम्मीद को पूरा करता है। हालांकि निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे उसी कंपनी के पेपर खरीदे, जिनका ट्रैक रिकार्ड अच्छा है। इसके लिए कंपनी की हिस्ट्री को सर्च किया जा सकता है। कामर्शियल पेपर की वैल्यू से भी उनके ट्रैक रिकार्ड का पता चलता है।

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वाणिज्य या कामर्शियल पेपर को असुरक्षित निवेश की श्रेणी में है

कंपनियों द्वारा जारी वाणिज्य या कामर्शियल पेपर की खरीद-फरोख्त को आमतौर पर असुरक्षित निवेश की श्रेणी में रखा जाता है। अगर यह बैंकों द्वारा जारी नहीं किया जा रहा है तो इसके लिए किसी तरह की गारंटी कम ही दी जाती है। लोगों को अपने रिस्क पर इसे खरीदना होता है, जिसके लिए उन्हें कभी-कभी नुकसान का सामना भी करना पड़ता है या फिर उन्हें वह फायदा हासिल नहीं होता है, जिसके लिए वे इसमें निवेश करते हैं। ज्यादातर कंपनियां कम अवधि की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ही कामर्शियल पेपर को जारी करती हैं।

कामर्शियल पेपर से पूंजी जुटाना है उद्देश्य

कामर्शियल पेपर जारी करने की भी अपनी क्रोनोलॉजी है। आमतौर पर आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनियां ही वाणिज्य पत्रों को जारी करती हैं। बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां भी हैं, जो अपनी पूंजी बढ़ाने के लिए इन्हें जारी करती हैं। कामर्शियल पेपर के जरिए उनके पास एक मुश्त रकम पहुंच जाती है, जिसका इस्तेमाल वह अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए करती हैं। कुलमिलाकर कामर्शियल पेपर जारी करने का उद्देश्य पैसा जुटाना है, जिसके लिए निवेशकों को ब्याज के साथ रिटर्न की पेशकश की जाती है।

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Munendra Singh

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