CKYC Number क्या है | सेंट्रल केवाईसी का फुल फॉर्म | CKYC स्टेटस ऑनलाइन कैसे चेक करें

सीकेवाईसी नंबर (CKYC Number) क्या होता है

सेंट्रल केवाईसी के जरिए अपनी वित्तीय पहचान स्पष्ट की जा सकती है। सीकेवाईसी नंबर दर्ज करने के बाद किसी भी तरह के निवेश के लिए पात्र मान लिए जाते हैं। इसका संबंध आमतौर पर म्युचुअल फंड और बैंकों के साथ है। बीमा, स्टॉक ब्रोकर और म्यूचुअल फंड्स द्वारा सीकेवाईसी कराया जा सकता है। इस आर्टिकल में सेंट्रल केवाईसी (CKYC Number) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इससे जुड़े दूसरे सभी जरूरी तकनीकी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

लिक्विड फण्ड, डेब्ट फण्ड क्या है | Difference Between Liquid Funds vs Debt Funds in Hindi

सीकेवाईसी का फुलफार्म | CKYC FULL FORM

सीकेवाईसी का फुलफार्म “सेंट्रल नो योर कस्टमर” हिंदी में जिसका मतलब “केंद्रीय स्तर पर आप अपने ग्राहक के बारे में जाने” है। अगर कोई व्यक्ति सीकेवाईसी कराना चाहता है तो उसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त वित्तीय या विनियमित संस्थानों से संपर्क करना होगा। इस प्रक्रिया का संचालन सेबी, आईआरडीए और पीएफआरडीए द्वारा किया जाता है। सेबी द्वारा विनियमित संस्थान, जैसे म्यूचुअल फंड्स, बीमा, स्टॉक ब्रोकर द्वारा भी केवाईसी कराया जा सकता है।

केंद्रीय स्तर पर लेन-देन के लिए जरूरी

अगर कोई व्यक्ति वित्तीय या फिर विनियमित संस्थानों द्वारा केंद्रीय स्तर पर लेन-देन करता है तो उसके लिए जरूरी है कि वह सीकेवाईसी कराए। सेंट्रल केवाईसी का रजिस्ट्रेशन चूंकि केंद्रीय स्तर पर ही किया जाता है, इसलिए सीकेवाईसी भी सेंट्रल लेवल पर ही किया जाएगा। उनके रिकार्ड संभालकर रखे जाते हैं। इस तरह के रिकार्ड की ऑनलाइन मौजूदगी की वजह से वित्तीय संस्थान किसी भी ग्राहक की पहचान आसानी के साथ कर सकते हैं। आमतौर पर बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंडों और एनबीएफसी द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है।

बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) क्या होता है | Insurance Ombudsman in Hindi

सीकेवाईसी के उद्देश्य

सीकेवाईसी के कई छोटे-बड़े उद्देश्य हैं। इस प्रक्रिया को लांच करने का मुख्य उद्देश्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े देश के सभी नागरिकों की पहचान करना है। पहले सिर्फ केवाईसी ही होती थी। यानी बैंक, बीमा कंपनी, म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय संस्थान अपने-अपने स्तर पर केवाईसी करते थे। अगर कोई व्यक्ति बैंकों के साथ बीमा कंपनियों से भी जुड़ना चाहता था तो उसे नए सिरे से केवाईसी कराना पड़ता था। इसी तरह म्यूचुअल फंड के लिए भी अलग से केवाईसी कराना होता था। इस वजह से एक व्यक्ति को अलग-अलग समय पर केवाईसी की प्रक्रिया से गुजरना होता था। यही वजह है कि सेंट्रल केवाईसी की प्रक्रिया को शुरू किया गया, ताकि वित्तीय संस्थानों से जुड़े आम लोगों को अलग-अलग स्तर पर केवाईसी के झंझट से निजात मिल सके।

सीकेवाईसी नंबर (CKYC Number) क्या है

सेंट्रल लेवल पर केवाईसी कराने पर वित्तीय संस्थानों से जुड़े निवेशकों या ग्राहकों को 14 अंकों वाले किन नंबर प्रदान किए जाते हैं। इसे केवाईसी नंबर भी कहा जाता है। इसका सबसे बड़ फायदा यह है कि लोगों को बीमा कंपनी, बैंक, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए ढेर सारी औपचारिकताएं पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्हें बस सीकेवाईसी नंबर देना होता है, जिसके बाद वे किसी भी स्तर पर निवेश के लिए पात्र मान लिए जाते हैं। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। लोगों को इसकी वजह से तमाम तरह की औपचारिकताओं को पूरा करना होता था।

फाइनेंशियल प्लानिंग क्या है | Financial Planning Explained in Hindi

सीकेवाईसी के लिए जरूरी दस्तावेज

  • आधार कार्ड की कॉपी
  • वोटर आईडी कार्ड
  • पैन कार्ड की कॉपी
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • वैलिड मोबाइल नंबर
  • एक्टिव ई-मेल आईडी

सीकेवाईसी फार्म कैसे डाउनलोड करें

सीकेवाईसी के लिए एक फार्म भरना होता है। वित्तीय संस्थानों के जरिए फार्म को हासिल किया जा सकता है। उनकी ऑफीशियल वेबसाइट पर विजिट कर फार्म को डाउनलोड भी कर सकते हैं। फार्म पर सभी जरूरी जानकारी दर्ज करें। नाम, जन्मतिथि, स्थायी या फिर अस्थायी पता भी लिखना होगा। फार्म पर सभी जरूरी जानकारी दर्ज करने के बाद दस्तावेजों को उसके साथ अटैच करना होगा। हस्ताक्षर और पासपोर्ट साइज फोटो भी अपलोड करें। इसके बाद सबमिट बटन को प्रेस करने पर प्रकिया पूरी हो जाएगी। इसका प्रिंट आउट भी रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इसका स्टेटस भी चेक किया जा सकता है।

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम क्या है | CLSS (सीएलएसएस) Explained in Hindi

सीकेवाईसी के फायदे

सेंट्रल केवाईसी के कई छोटे-बड़े फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को आसानी के साथ स्पष्ट कर सकते हैं। उनके लिए यह एक रिकार्ड की तरह है। एक वित्तीय संस्थान से दूसरे वित्तीय संस्थान में ट्रांसफर होने के लिए नए सिरे से सीकेवाईसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। 14 डिजिट के किन नंबर को दर्ज करने के बाद उनकी पहचान स्पष्ट हो जाएगी। इसी तरह वित्तीय संस्थानों और सरकार के लिए भी यह आसान है। उनके लिए एक वर्ग विशेष की पहचान करना आसान हो गया। यह उनके रिकार्ड में दर्ज हो जाता है।  

पीआईबी या प्रेस सूचना ब्यूरो क्या है | फुल फॉर्म | What is PIB Explained in Hindi 

Munendra Singh

Leave a Comment

%d bloggers like this: