बैंकरप्सी (दिवाला और दिवालियापन) कोड क्या है | Bankruptcy Code Explained in Hindi

बैंकरप्सी कोड (Bankruptcy Code) क्या होता है

भारत सरकार ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के जरिए बड़े बकायादारों पर शिकंजा कसा है। सरकार को इसका फायदा भी मिल रहा है। बैंकों को करोड़ों-अरबों रुपये का चूना लगाकर विदेश भाग चुके भारत के कई छोटे-बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। कोड लागू होने के बाद पूंजीपतियों में डर बैठ गया है। खासकर उन लोगों के अंदर, जो चपत लगाने की मंशा के साथ बैंकों से बड़ा लोन हासिल करते हैं। इस आर्टिकल में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। कोड लागू होने के बाद उद्योगपतियों पर इसका क्या असर पड़ा, इसपर भी रोशनी डाली जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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बैंकरप्सी कोड का कानून कब लागू हुआ

केंद्र सरकार ने तमाम अनियमितताओं के बीच बैंकिंग व्यवस्था में बुनियादी सुधार करते हुए 2016 में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) कानून को पारित किया था। कानून पारित होने के बाद संपत्ति मालिकों और बैंकों के बीच का विवाद पूरी तरह खत्म हो गया है। मालिकों के पास अब अपनी संपत्ति को नीलाम करने का अधिकार नहीं है। लोन के एवज में गिरवी रखी गई संपत्तियों को नीलम करने का अधिकार पूरी तरह बैंकों के पास आ गया है। बैंक आरबीआई और भारत सरकार के नियमों के आधार पर संपत्तियों को नीलाम कर लोन की भरपाई कर सकेंगे।  

बैंकरप्सी कोड (Bankruptcy Code) का क्या असर है

बैंकरप्सी कोड का असर भी देखने को मिल रहा है। पूंजीपतियों और उद्योग घरानों में इस कानून को लेकर डर है। इसका असर यह है कि ज्यादातर कर्जदार कंपनियां और उद्योगपति संबंधित बैंकों को बकाया लौटा रहे हैं। ज्यादातर उद्योग घरानों के लोग बैंकों में पहुंचकर कर्ज को लौटाने की मोहलत मांग रहे हैं। इसके अलावा जो उद्योगपति, पूंजीपति और छोटी-बड़ी कंपनियों के मालिक बैंकों को करोड़ों-अरबों रुपये का चूना लगाकर विदेश भाग चुके हैं, भारत में उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है। बैंकों को इसके लिए सरकार का सपोर्ट भी मिल रहा है।

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इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड कानून के तहत 80 हजार करोड़ की राशि वसूल की गई

कॉरपोरेट मामलों के जानकारों के मुताबिक भारत में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और एनसीएलएटी के तहत कई मामले हैं, जिनमें उद्योग घरानों के लोग बैंकों से लोन हासिल कर कर्ज की अदायगी नहीं कर रही है। इसमें भारत की छोटी-बड़ी कई मशहूर कंपनियां शामिल हैं। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड कानून के तहत 2018 में बैंकों द्वारा उद्योगपतियों से करीब 80 हजार करोड़ रुपये की वसूली की गई है। इनती बड़ी राशि एनपीए यानी नॉन पर्फामिंग एसेट का हिस्सा बन चुकी थी। इस तरह यह समझा जा सकता है कि दिवालिया कानून के जरिए सभी बैंकों के लिए एनपीए मामलों में त्वरित कार्रवाई करना आसान हो गया है।

बैंकरप्सी कोड के तहत लाख करोड़ रुपये का एनपीए

भारत में करीब 10 लाख करोड़ रुपये नॉन पर्फार्मिंग एसेट (इनपीए) का हिस्सा बन चुका है। एनपीए उस राशि को कहते हैं, जो बैंकों द्वारा उद्योगपतियों, पूंजीपतियों, उद्योग घरानों और छोटी-बड़ी कंपनियों के लिए कर्ज के रूप में जारी की जाती हैं। मियाद गुजरने के बाद भी जब कर्ज की अदायगी नहीं हो पाती है, या फिर किस्तों के रूप में भी बैंकों तक पैसा नहीं पहुंचता है तो फंसी हुई राशि को एनपीए मान लिया जाता है। भारत में एनपीए लगातार बढ़ रहा है। 2014 में करीब तीन लाख करोड़ रुपये का एनपीए था, जबकि गुजरे छह सालों में यह बढ़कर दस लाख करोड़ पहुंच गया है।

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बैंकरप्सी कोड से क्या बदलाव आया

बैंक किसी भी उद्योग घरानों या कंपनियों को कर्ज देने के एवज में उनकी संपत्तियों को गिरवी रखता है। इसके लिए संपत्ति के कागजात बैंकों में जमा किए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि बकायादारों द्वारा कर्ज की अदायगी न कर पाने के बाद बैंकों द्वारा उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा सके। चूंकि पुराने कानून में यह अच्छी तरह स्पष्ट नहीं किया गया था कि संपत्ति को नीलाम करने का अधिकार किसके पास रहेगा। बकायादार कई मामलों में कोर्ट पहुंचकर इसे और पेचीदा बना देते थे। उनका तर्क था कि संपत्तियों को नीलाम करने का अधिकार उन्हें दिया जाए। जबकि बैंक संपत्तियों को नीलाम करने का अधिकार अपने पास रखना चाहते थे। इसकी वजह से बैंकों की राशि तो फंसी रहती ही थी, एनपीए भी बढ़ता था।

बैंकरप्सी कोड कानून के जरिये बैंक करेंगे संपत्तियों को नीलाम

बैंकरप्सी कोड कानून पारित होने के बाद बैंकों को संपत्तियों को नीलाम करने का अधिकार मिल गया है। बकायादार अब अपनी संपत्तियों को नीलाम नहीं कर सकेंगे। उनके अंदर इसकी वजह से डर बैठ गया है। वहीं बैंकों के लिए कर्ज की वसूली करना आसान हो गया है। वे बकायादारों की संपत्तियों को नीलाम कर लोन की भरपाई कर रहे हैं। वहीं इसका असर उद्योग घरानों पर भी पड़ रहा है। वे बैंकों के कर्ज को खुद ही वापस करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके लिए बैंकों से संपर्क किया जा रहा है। विदेश भाग चुके बकायादार भी डरे हुए हैं। वे बैंकों के साथ बैठकर मसले को सुलझाने की बात कर रहे हैं।

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बैंकरप्सी कोड के जरिये कई और प्रावधान भी जुड़ें

इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड कानून को केंद्र सरकार की सफलता के रूप में देखा जा सकता है। सरकार ने शुरुआती सफलता के बाद इसमें कई और प्रावधान जोड़े हैं। इसके लिए 2017 में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी संशोधन विधेयक 2017 को संसद में पारित किया गया था, जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री ने कहा था यह संधोशन विधेयक बैंकरप्सी कोड कानून 2016 की जगह लेगा। इसमें बैंकों को कई और तरह के अधिकार भी दिए गए हैं, ताकि बकायादार उन्हें चपत न लगा सकें। कुलमिलाकर यह कहा जा सकता है कि बैंकों की पावर बढ़ गई है।

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Munendra Singh

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