बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 क्या है | Banking Regulation Act, 1949 in Hindi

Banking Regulation Act, 1949 in Hindi

बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के दायरे में कई अहम टर्मनोलॉजी को शामिल किया गया है। यह अधिनियम बैंकों को जहां मजबूत बनाते हैं, वहीं बैंकों से जुड़ी कंपनियों को भी कई तरह के अधिकार देता है। इस अधिनियम को पूरे देशभर के लिए लागू किया गया है और बैंकों को इसका पालन करना होता है। इस आर्टिकल में बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं।

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बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 कब बना था

बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 में बना था। इस अधिनियम की तरह निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट और कंपनी एक्ट 1956 को भी पास किया गया था। ये सभी एक्ट एक पूरक अधिनियम के रूप में कार्य करते हैं। खास बात यह है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 बाद में 1966 को बैंकिंग नियंत्रण अधिनियम 1949 के रूप में परिवर्तित हो गया था। यह अधिनियम में जम्मू एंड कश्मीर में 1956 में प्रभावी हुआ था।

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बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 किन क्षेत्रों के लिए सही नहीं है

बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 को प्राथमिक कृषि, ऋण समितियों, सहकारी भूमि बंधक बैंकों और गैर कृषि समितियों के संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसी कंपनी हैं, जिन्हें बैंकिंग कंपनी के रूप में जाना जाता है। ये कंपनियां भारत में बैंकिंग का कारोबार संपन्न करती हैं। कंपनी अधिनियम के दायरे में रहकर राज्यों के मुद्दों का समाधान भी करती हैं।

बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत व्यापार की अनुमति

यह अधिनियम मुख्य रूप से बैंकिंग कंपनियों को भारत में कारोबार करने की अनुमति प्रदान करता है। इसमें विदेशी मुद्रा को जारी करना, जमा पूंजी को खरीदना, सिक्यूरिटी बॉंड और अन्य प्रतिभूतियों को ग्राहकों की तरफ से खरीदना, पैसों को उधार देना, गारंटी के साथ कारोबार करना, वित्तीय कार्यों और क्षतिपूर्ति व्यापार को संपादित आदि कार्य शामिल हैं। इसी तरह बैंक की संपत्ति का निस्तारण करना भी इसमें शामिल है।

Banking Regulation Act, 1949 के तहत रिजर्व फंड

बैंकिंग कंपनी कर और ब्याज के रूप में प्राप्त धनराशि से अधिक रकम को अपने पास संरक्षित या उत्पादित कर सकती है। यह आरक्षित राशि बैंक लाभ राशि के किसी भी दर पर 20 प्रतिशत तक होना चाहिए। इसी तरह बैंकों को अपनी जमा पूंजी की तीन फीसदी रकम को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास रखना होता है। यह राशि हर महीने के दूसरे पखवाड़े के अंतिम शुक्रवार को रखा या जमा करना चाहिए।

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Munendra Singh

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