बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है | ऑनलाइन शिकायत फॉर्म डाउनलोड | टोल फ्री नम्बर

Banking Ombudsman Scheme

बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए बैंकिंग लोकपाल योजना की शुरुआत की गई है। लोग, कंपनी या फिर कोई संस्था अगर किसी बैंक की सेवा से संतुष्ट नहीं है तो वह लोकपाल से इसकी शिकायत कर सकती है। योजना को मजबूत बनाने के लिए इसमें कई अहम क्लॉज जोड़े गए हैं, ताकि ग्राहकों की शिकायतों का निस्तारण आसानी के साथ किया जा सके। इस आर्टिकल में बैंकिंग लोकपाल योजना के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। लोकपाल का कार्य क्षेत्र और हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी बताया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं।

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बैंकिंग लोकपाल योजना का शुरुआत कब हुआ

भारत सरकार द्वारा बैंकिंग लोकपाल योजना को 1995 में शुरू किया गया था। 2002 और 2006 में इसमें कई तरह के संशोधन किए गए। कई नियमों में किए गए जरूरी संशोधन के बाद बैंकिंग लोकपाल का दायरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह जरूरी था। ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि बैंक स्वच्छ, भेदभाव रहित और पारदर्शी रहते हुए अपनी सेवा प्रदान कर सकें।

बैंकिंग लोकपाल से करें शिकायत यदि बैंक की सेवा से संतुष्ट नहीं है तो

ग्राहक अगर किसी बैंक की सेवा से संतुष्ट नहीं है तो वह इसकी शिकायत बैंकिंग लोकपाल से कर सकते हैं। अधिकारी और कर्मचारी की शिकायत भी की जा सकती है। लोग ई-मेल, डाक सेवा या ऑनलाइन पोर्टल पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायतों का निस्तारण 30 दिनों के अंदर किया जाएगा। ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे पहले बैंक के उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत करें। समाधान न होने पर लोकपाल को शिकायती पत्र भेज सकते हैं। शिकायत के मामले एक साल के अंदर होने चाहिए। एक साल के बाद मामलों की शिकायतों को संज्ञान में नहीं लिया जाएगा।

बैंकिंग लोकपाल द्वारा न्यायालय में विचाराधीन मामलों का निस्तारण नहीं

ग्राहक अगर बैंक से जुड़े मामले को उपभोक्ता फोरम या फिर न्यायालय में ले गए हैं तो फिर बैंकिंग लोकपाल द्वारा उसकी शिकायत का निस्तारण नहीं किया जाएगा। शिकायत करते समय उसके बारे में पूरी डिटेलिंग करना होगा। लोकपाल को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता है। इस कंडीशन में ग्राहकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लिहाजा लोकपाल के यहां ताजा मामलों को ही दर्ज कराना चाहिए, ताकि ग्राहकों को इसका फायदा मिल सके।

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बैंकिंग लोकपाल तहत 10 लाख रुपये तक के मामले की सुनवाई

बैंकिंग लोकपाल के क्लॉज के तहत ग्राहक आमतौर पर 10 लाख रुपये तक के मामलों की शिकायत ही कर सकते हैं। लोकपाल को पूरा अधिकार है कि वह इसपर अपना फैसला सुना दे। दस लाख रुपये से ज्यादा तक के मामलों में ग्राहकों की शिकायतों को लोकपाल द्वारा खारिज किया जा सकता है। इसलिए ग्राहकों को इस नियम के दायरे में रहकर ही शिकायतों को दर्ज कराना चाहिए।

बैंकिंग लोकपाल योजना की शक्तियां

  • बैंकिंग लोकपाल योजना के तहत लोकपाल को इस मामलें में कई तरह की शक्तियां प्रदान की गई हैं। लोकपाल बैंक और उसके अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ की गई शिकायतों पर विचार करेगा।
  • बैंक प्रबंधन से इस मामले में बात कर सकता है। नोटिस जारी कर जवाब देने को भी कहा जा सकता है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर बैंकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।
  • लोकपाल की कोशिश रहती है कि वह बैंक और ग्राहक के बीच पुल का काम करें। इस कड़ी में दोनों के बीच समझौता भी कराया जा सकता है। खंड 4 और 8 के तहत लोकपाल को इस तरह की कई शक्तियां प्रदान की गई है।

बैंकिंग लोकपाल का मॉनिटरिंग आरबीआई करती है

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया योजना की मॉनिटरिंग करता है। लोकपाल द्वारा हर साल 30 जून को आरबीआई गर्वनर को रिपोर्ट भेजा जाता है। रिपोर्ट में साल भर की गतिविधियों का जिक्र रहता है। अगर कोई मामला जनहित में है तो लोकपाल द्वारा दी गई सूचना को आरबीआई द्वारा प्रकाशित किया जा सकता है। इसका मकसद लोगों को बैंकिंग के प्रति जागरूक करना है।

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बैंकिंग लोकपाल योजना के तहत ऑनलाइन शिकायत करने की प्रक्रिया

  • ग्राहक बैंक या उसके कर्मचारियों के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं। उन्हें इसके लिए secweb.rbi.org पर विजिट करना होगा।
  • शिकायत में अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी लिखें। बैंक और उसकी ब्रांच का नाम भी लिखें।
  • ब्रांच का पता भी लिखना होगा। अगर शिकायत किसी कर्मचारी के खिलाफ है तो उसका नाम भी लिख सकते हैं।
  • शिकायत की जायज वजह क्या है और स्थानीय स्तर पर इसका निस्तारण नहीं हुआ, यह भी लिखना होगा।

शिकायत से जुड़े मामले

  • ग्राहक कई तरह के मामलों में लोकपाल के यहां शिकायत दर्ज करा सकते हैं। किसी भी तरह के भुगतान, चेक, ड्राफ्ट को लेकर शिकायत की जा सकती है।
  • बैंक द्वारा की गई लापरवाही, भुगतान में देरी, अकाउंट खोलने में देरी, तय ब्याज की दरों के मुताबिक रुपये न देने के मामले में भी शिकायत कर सकते हैं।
  • कर भुगतान लेने से मना करने पर, जमा खाता खोलने से मना करने पर, नियम से ज्यादा शुल्क लेने पर भी शिकायत की जा सकती है।
  • काम करने के निर्धारित समय का पालन न करने और सिक्कों को बिना पर्याप्त कारण के स्वीकार न करने पर भी बैंक के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।

बैंकिंग लोकपाल किसे बनाया जाता है

वरिष्ठ अधिकारी को बैंकिंग लोकपाल बनाया जाता है। मौजूदा समय में 15 बैंकिंग लोकपाल हैं, जिनका कार्य क्षेत्र अलग-अलग है। बैंकिंग लोकपाल के कार्यालय अलग-अलग प्रदेशों की राजधानी में हैं। बैंकिंग लोकपाल योजना में अनूसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अनूसूचित वाणिज्यिक बैंक भी शामिल हैं। कोई भी अधिकृत प्रतिनिधि बैंकों, उसके अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लोकपाल के यहां शिकायत दर्ज करा सकता है। भविष्य में बैंकिंग लोकपाल का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

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Munendra Singh

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