बैंकों का विलय क्या है | पीएसयू बैंकों के विलय सूची | बैंक मर्जर से फायदे और लाभ क्या है

बैंकों का विलय क्या होता है

भारत में बैंकों का विलय होता रहा है। केंद्र सरकार और आरबीआई विलय पर अपना पक्ष रखती हैं, जबकि कर्मचारी आमतौर पर इसका विरोध करते हैं। बैंक विलय के अपने फायदे और नुकसान, दोनों हैं। आर्थिक संकट और तकनीकी सुधार को ध्यान में रखते हुए भी बैंकों का विलय किया जाता है। इस आर्टिकल में बैंक विलय के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बैंक विलय का आधार क्या है, इसके नुकसान और फायदे क्या हैं? इनसे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को अंत तक पढ़ सकते हैं। 

CRR, SLR, MSF क्या है | फुल फॉर्म | सीआरआर, एसएलआर, एमएसएफ के बारे में जानकारी

बैंक विलय का मतलब

भारत में बड़ी संख्या में छोटे और बड़े बैंक हैं, जो अपने-अपने संसाधन के मुताबिक काम करते हैं। बैंकिंग व्यवस्था को सुधारने के लिए दो या दो से ज्यादा बैंकों को मिलाकर एक कर दिया जाता है। किस बैंक का विलय होगा और कौन लीड बैंक की भूमिका में होंगे, इसकी स्थिति को बहुत साफ नहीं किया गया है। सरकार आरबीआई की गाइडलाइंस और कुछ हद तक अपने हिसाब से बैंकों का विलय करती है। 

बैंक विलय के लाभ

  • बैंक मर्जर के कई बड़े फायदे हैं। आरबीआई और भारत सरकार का दावा है कि विलय की वजह से बैंकों की स्थिति मजबूत होती है।
  • बैंकों के संचालन में आ रही लागत को कम किया जा सकता है। उनकी पहुंच नए प्रदेशों और शहरों तक हो सकती है।
  • बैंक कर्मचारियों के वेतन में होने वाली असमानता को दूर किया जा सकता है। कर्मचारियों को एक बैंक पॉलिसी का फायदा मिल सकता है।
  • बैंकों को नई तकनीक के साथ जोड़ा जा सकता है। खाताधारकों को भी आसानी होती है। उनके लिए लेन-देन आसान हो सकता है।

बैंक विलय के नुकसान

  • सरकार यह दावा तो करती है कि बैंक विलय से कर्मचारियों को फायदा होगा, लेकिन जमीन पर ऐसा नहीं है। क्षेत्रीय लाभ समाप्त हो जाते हैं।
  • मर्ज होने वाले बैंकों के कर्मचारियों की निर्भरता लीड बैंक पर बढ़ जाती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि प्रमोशन के मामले में लीड बैंक अपने कर्मचारियों को तरजीह देते हैं।
  • इसी तरह वेतन और कामकाज को लेकर भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से कर्मचारी विलय के खिलाफ रहते हैं।
  • सबसे खास बात यह है कि आर्थिक संकट के समय में बड़े यानी लीड बैंकों में अधिक जोखिम होता है।

खाताधारकों पर बैंक विलय का असर क्या होगा

विलय के साथ बैंको की पुरानी व्यवस्था बदल जाती है। उदाहरण के तौर पर इलाहाबाद बैंक के खाताधारकों के पास, फिलहाल जो चेक बुक है, वह इंडियन बैंक की चेकबुक के साथ बदल जाएगी। खाताधारकों को इसी तरह बैंकों को नए सिरे से जानकारी देना होता है। केवाईसी की औपचारिकता भी दोबारा की जा सकती है। पुराने बैंक के साथ खाताधारक अपना जुड़ाव महसूस करते हैं, जबकि विलय के बाद उन्हें लीड बैंक के नियमों के आधार पर चलना होता है।

ग्रामीण बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक क्या है | देश में कुल ग्रामीण बैंक की सूची की जानकारी [लिस्ट डाउनलोड]

कैसे होता है बैंकों मर्जर

बैंकों के विलय के लिए कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती है। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाता है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही बैंकों को सक-दूसरे में विलय किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने 2020 में 10 छोटे-बड़े बैंकों को मिलाकर चार नए बैंक बनाने का एलान किया था। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विलय की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

किन – किन बैंकों का हुआ विलय

  • कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक के साथ विलय कर दिया गया है।
  • सिंडीकेट बैंक को केनरा बैंक के साथ मर्ज किया गया है, जबकि आंध्रा और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ मर्ज किया गया है।
  • भारत के सबसे पुराने और बड़े बैंकों में शुमार इलाहाबाद बैंक को भी इंडियन बैंक के साथ मर्ज किया गया है।
  • इससे पहले 2015-26 में भी कई छोटे-बड़े बैंकों को एक-दूसरे बैंकों के साथ मर्ज किया गया था। बैंकों का दायरा सिमट रहा है।

बैंक मर्जर का उद्देश्य

बैंक मर्जर के कई उद्देश्य होते हैं। सरकार यह मानती हैं कि बैंक मर्जर से बैंकिंग सिस्टम में सुधार आएगा, लेकिन आमतौर पर इसका दूसरा मकसद होता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बैंक मर्जर को आमतौर पर आर्थिक संकट से जोड़कर देखा जाता है। चूंकि भारतीय बैंकों का एनपीए यानी नॉन पफॉर्मिंग ऐसट 10 लाख करोड़ के पार चला गया है। बैंकों में कैश की प्रॉब्लम बताई जा रही है। विलय के बाद अलग-अलग बैंकों की पूंजी एक मान ली जाएगी, जिसके बाद बैंकों की जमापूंजी बढ़ी हुई दिखाई जा सकती है।

बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था

देश की आजादी के बाद 20 जुलाई 1969 को देश के 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था। सरकार के इस फैसले की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि और लघु उद्योग, निर्यात पर गुणात्मक असर पड़ा था। इसके बाद कई दूसरे बैंकों का भी राष्ट्रीयकरण किया गया, जिसकी वजह से यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बन गया था। अब चूंकि इतने बड़े पैमाने पर बैंकों का मर्जर हो रहा है, इसलिए बैंक मामलों के एक्सपर्ट और अर्थशास्त्री इसकी समीक्षा कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पहले इतने बड़े पैमाने पर बैंकों का मर्जर कभी नहीं हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है | RBI के कार्य | अधिकार | दिशा-निर्देशों की जानकारी

Munendra Singh

Leave a Comment

%d bloggers like this: