बैंक क्या होता है | बैंक कितने प्रकार के होते है | परिभाषा | बैंक के कार्य व अधिकार

बैंक (BANK) क्या है

बैंक एक वित्तीय संस्थान है, जो लोगों को पैसा जमा करने और निकालने की सुविधा प्रदान करता है। जरूरतमंदों के लिए ऋण की सुविधा भी प्रदान की जाती है। बैंकों की स्थापना का मकसद सिर्फ कारेबार करना ही नहीं है, देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान देना भी है। सामाज के निर्माण के लिए भी बैंकों की उपयोगिता अहम है। इस आर्टिकल में बैंक (BANK) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। बैंक कितने प्रकार के होते हैं और उनकी कार्य क्षमता क्या है, इन विषयों पर भी रोशनी डाली जाएगी। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) क्या है | FATF (एफएटीएफ) Full Form in Hindi

बैंक की शुरुआत कब हुई

भारत में करीब 200 साल पहले बैंकों की शुरुआत हुई थी। इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी। बैंक ऑफ बंगाल की शुरुआत के साथ लोगों को अपनी पूंजी जमा करने का जरिया मिला था। 1809 में बैंक ऑफ बॉंबे और 1840 में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना की गई थी। 1843 में तीनों बैंकों को मिलाकर इंपीरियल बैंक बना दिया गया था। इसके बाद 1955 में इंपीरियल बैंक को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में बदल दिया गया। इलाहाबाद बैंक भारत का पहला प्राइवेट बैंक था, जिसका 1969 में राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था। इलाहाबाद बैंक की स्थापना के बाद ही भारत में निजी बैंकों के खुलने की व्यवस्था शुरू हुई, जो आज भी बदस्तूर जारी है।

बैंकों के मुख्य कार्य

बैंकों के कई महत्वपूर्ण काय हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को लेन-देन की सुविधा प्रदान करना है। शुरुआती दौर में बैंकों में सिर्फ पैसे जमा करने की सुविधा थी। लोग अपने रुपयों को सुरक्षित करने के लिए बैंकों में जमा करते थे। जरूरत पड़ने पर उन्हें बैंकों से निकाल लेते थे। बैंकों में जब बड़े पैमाने पर पैसे जमा होने लगे तो कंपनी एक्ट के तहत बैंकों को इन पैसों से कारोबार करने की छूट मिल गई। बैंकों की आमदनी बढ़ने लगी और फिर यह तय किया गया कि आमदनी का लाभ ग्राहकों को भी दिया जाएगा। इसके बाद लोगों को उनकी जमा पूंजी के बदले ब्याज मिलने लगा।

वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) क्या है | वित्तीय समावेशन के उद्देश्य की जानकारी

बैंक (BANK) के माध्यम से लोन की व्यवस्था

बैंकों का कारोबार बढ़ने के बाद आरबीआई ने यह तय किया कि इन पैसों से लोगों की जरूरत पूरी की जाए। उन्हें ऋण की सुविधा मुहैया कराई जाए, ताकि लोग लोन के बदले मिले पैसों का इस्तेमाल घर का निर्माण, रोजगार के अवसर पैदा करने और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भी कर सकें। यही नहीं, आरबीआई ने यह भी तय कर दिया कि बैंकों में लाभ के रूप में जमा 90 फीसदी रकम लोन के रूप में उन लोगों को दी जाए, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। मध्य वर्गीय परिवारों के लिए भी बड़े पैमाने पर लोन की व्यवस्था की गई है। जबकि बचे हुए 10 फीसदी रकम पर हायर क्लास का अधिकार है। यह रकम मुख्य रूप से उद्योग या शिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए दी जाती है।

बैंक (BANK) में मिलने वाली सुविधाएं

बैंक अब ग्राहकों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। इनमें पैसों के लेन-देन, ऋण की व्यवस्था, क्रेडिट और डेबिट कार्ड जारी करना, एटीएम स्थापित करना के साथ ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा भी शामिल है। बैंकों की पहुंच आम लोगों तक हो गई है। अब बहुत कम ऐसे लोग हैं, जिनका खाता बैंकों में नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी बैंक शाखाएं खुल गई हैं, जहां बड़े पैमाने पर लेन-देन किया जा रहा है। इसमें निजी बैंकों की भी बड़ी भूमिका है। शहरी इलाकों में निजी बैंकों की वजह से लोगों को ज्यादा सहूलियतें मिली हैं। चूंकि सरकारी बैंकों में लोग ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं, इसलिए उनकी क्रेडिबिलिटी भी ज्यादा है।  

जीवन बीमा (Life insurance) क्या होता है | कितने प्रकार के होते है | लाभ | उद्देश्य

बैंक के द्वारा लॉकर की व्यवस्था

बैंक अपने ग्राहकों को लॉकर की सुविधा भी देते हैं। भारत में ज्यादा राष्ट्रीय बैंकों में लॉकर की सुविधा है। ग्राहक जरूरत पड़ने पर लॉकर बुक करा सकते हैं। लॉकर में महंगे और कीमती जेवरात यानी आभूषणों के साथ जमीन-जायदाद से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी रखे जाते हैं। लॉकर के लिए सुरक्षा के लिए बीमा भी कराया जाता है। किसी तरह के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा की सुविधा है। बीम कंपनियां ग्राहकों को भुगतान करती हैं। हालांकि लॉकर की संख्या कम होने की वजह से यह इतनी आसानी से मिल नहीं पाता है। लोगों को एप्लीकेशन लिखने के बाद इंतजार करना पड़ता है।

बैंक में मनी ट्रांसफर की सुविधा

बैंक अपने ग्राहकों को मनी ट्रांसफर की सुविधा भी प्रदान कर रहे हैं। लोग एक बैंक से दूसरे बैंक में मनी ट्रांसफर कर सकते हैं। अगर किसी का खाता एसबीआई में है और वह किसी वजह से दूसरे शहर में है तो ग्रीन कार्ड के जरिए पैसे जमा किए जा सकते हैं। यही नहीं, ग्राहक दूसरे के बैंक खातों में भी पैसे जमा कर सकते हैं। भारत में किसी भी जगह पर रहकर यह काम आसानी से किया जा सकता है। बैंक इसी तरह अपने ग्राहकों को चेक जारी करने और डीडी बनवाने की सुविधा भी देते हैं।

IRDAI क्या है | आईआरडीए (IRDA) का फुल फॉर्म | कार्य, अधिकार की जानकारी

BANK अपने ग्राहकों को अपडेट करता रहता है

बैंकों द्वारा ग्राहकों को अपडेट भी किया जाता है। पैसों के लेन-देन से जुड़े मामलों में लोगों के मोबाइल नंबर पर एसएमएस भेजे जाते हैं। अगर किसी ने किसी के खाते में पैसे जमा किए हैं तो इसकी जानकारी एसएमएस के जरिए भेजी जाती है। इसी तरह पैसे निकालने की जानकारी भी एसएमएस के जरिए भेजी जाती है। लोग नेट बैंकिंग के जरिए भी अपडेट रह रहे हैं। मिस्ड कॉल के जरिए मिनिमम यानी न्यूनतम बैलेंस की जानकारी दी जाती है। एटीएम के जरिए ट्रांजैक्शन पर भी बैंकों द्वारा मैसेज भेजे जाते हैं।

बैंक के प्रकार (Type Of Bank)

भारत में बैंक अलग-अलग शैली के साथ काम करते हैं। बैंकों को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है, जिसमें सेंट्रल बैंक, पब्लिक सेक्टर बैंक, प्राइवेट सेक्टर बैंक, डेवेलपमेंट बैंक, कोआपरेटिव सेक्टर बैंक शामिल हैं। इस तरह इन बैंकों के अलग-अलग कार्य तो हैं ही, उनकी जिम्मेदारी भी अलग-अलग तय की गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत के सभी बैंकों की मॉनिटरिंग करता है और उसके द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश भी जारी किया जाता है।

Priority Sector Lending (PSL) क्या है | प्रायॉरिटी सेक्टर लेंडिंग के बारे में जानकारी

बैंकों की भूमिका

  • सेंट्रल बैंक को सीधे भारत सरकार गवर्न करती है। सेंट्रल बैंक द्वारा सभी तरह के बैंकों को गाइडलाइंस जारी की जाती है। संचालन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
  • पब्लिक सेक्टर बैंक आमतौर पर एसोसिएट के रूप में काम करते हैं। उन्हें स्टेट बैंक ग्रुप के नाम से भी जाना जाता है। इसमें 20 सदस्य हैं।
  • प्राइवेट सेक्टर बैंक के तहत एन एक्टिव फॉरेन बैंक ऑफ इंडिया, ओल्ड जनरेशन, न्यू शेडयूल्ड, न्यू जनरेशन, शेडयूल्ड कोआपरेटिव बैंक शामिल हैं।
  • डेवलपमेंट बैंक उसे कहते हैं, जो आमतौर पर जनता के साथ पैसों का लेन-देन नहीं करते हैं। इनका इस्तेमाल कृषि, व्यापार, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट, निर्माण क्षेत्र के लिए  किया जाता है।

Debenture (डिबेंचर) क्या है | शेयर और डिबेंचर के बीच का अंतर क्या है

कोआपरेटिव सेक्टर बैंक क्या है

सहकारी बैंक यानी कोआपरेटिव बैंकों का काम ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सिस्टम को खड़ा करना है। लोगों को लेन-देन की सुविधा तो प्रदान करना है ही, उनके लिए ऋण की व्यवस्था करना भी है। भारत के ज्यादातर राज्यों में सहकारी बैंक हैं। इसमें राज्य सरकारों की भागीदारी भी है। इसमें स्टेट कोआपरेटिव और सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक शामिल हैं। हालांकि आरबीआई ने कोआपरेटिव बैंकों का कई मामलों में दायरा सीमित कर रखा है। बावजूद इसके लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।

वाणिज्यिक पत्र (Commercial paper) क्या है | कमर्शियल पेपर की परिभाषा व अर्थ

Munendra Singh

Leave a Comment

%d bloggers like this: