बेल आउट पैकेज क्या है | Bail Out Package Meaning in Hindi

Bail Out Package

बेलआउट पैकेज जिसे एक तरह से प्रोत्साहन पैकेज भी कहा जाता है। यह पैकेज आमतौर पर उन संस्थाओं, सरकारी बॉडी या फिर बड़ी कंपनियों के लिए जारी किए जाते हैं, जो आर्थिक संकट से जूझ रहे होते हैं। कई मामलों में बेलआउट पैकेज देन की जिम्मेदारी सरकार की होती है तो कई मामलों में आरबीआई की जवाबदेही तय है। इस आर्टिकल में बेलआउट पैकेज (Bail Out Package) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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बेलआउट पैकेज के रूप में आरबीआई ने सरकार को दिया 1.76 लाख करोड़ रुपये

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018 में केंद्र सरकार को बेलआउट पैकेज के रूप में 1.76 लाख करोड़ रुपये दिए थे। चूंकि भारत सरकार उस समय आर्थिक संकट से जूझ रही थी, इसलिए उसे इससे उभारने के लिए आरबीआई ने अपने रिजर्व फंड में रखे पैसों का इस्तेमाल किया था। केंद्र सरकार ने आरबीआई से मांग की थी कि उसे भारी भरकम बेलआउट पैकेज की जरूरत है। आरबीआई ने सरकार की मांग को गंभीरता से लेते हुए बेलआउट पैकेज जारी कर दिया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस तरह संकट की घड़ी में बेलआउट पैकेज के नाम पर सरकार को आर्थिक मदद देने का काम करता है।

बैंकों के लिए भी बेलआउट पैकेज दिया गया है

आरबीआई संकट की घड़ी में सिर्फ सरकार को ही बेलआउट पैकेज नहीं देता है, बल्कि बैंकों के प्रति भी उसकी जवाबदेही बनती है। अगर कोई राष्ट्रीय बैंक आर्थिक संकट में फंस गया है। उसके डूबने का खतरा बढ़ गया है या फिर आर्थिक मदद न मिलने पर दीवालिया घोषित हो जाएगा तो इस मौके पर आरबीआई उस बैंक को बेलआउट पैकेज देता है। यह एक तरह का कर्ज है, जिसका इस्तेमाल कर आर्थिक संकट की घड़ी से बाहर आया जा सकता है। आरबीआई कई राष्ट्रीय बैंकों को बेलआउट पैकेज दे चुका है।

बेलआउट पैकेज के लिए सरकार की जिम्मेदारी

भारत सरकार भी इसी तरह बेलआउट पैकेज देने का काम करती है। अगर कोई भारतीय कंपनी आर्थिक संकट से जूझ रही है और उसने सरकार से बेलआउट पैकेज की मांग की है, तो नियमों का पालन करते हुए सरकार इस रकम को एक तय अवधि के लिए मंजूर कर सकती है। आर्थिक स्थिति ठीक होने के बाद कंपनी इस कर्ज को वापस करेगी। इसी तरह उद्योग घरानों के लिए भी बेलआउट पैकेज जारी करने का नियम है। हालांकि यह सरकार पर निर्भर है कि वह बेलआउट पैकेज देना चाहती है या नहीं। कंपनियां इसके लिए सरकार पर किसी तरह का दबाव नहीं बना सकती है।

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अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी बेलआउट पैकेज की व्यवस्था

इंटरनेशनल लेवल पर भी बेलआउट पैकेज देने की व्यवस्था है। अगर कोई देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसके लिए इस स्थिति से उभर पाना मुश्किल है तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर बेलआउट पैकेज जारी किया जा सकता है। आईएमएफ यानी अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष मुख्य रूप से बेलआउट पैकेज देने का काम करता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे देश के उच्च पदों पर बैठे लोग आईएमएफ से इसकी मांग करते हैं। आईएमएफ सभी जरूरी नियमों और पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बेलआउट पैकेज जारी कर सकता है।

Bail Out Package उन्हें मिलेगा जिनका नाम ग्रे लिस्ट में नाम न हो

आईएमएफ के जरिए बेलआउट हासिल करने की सबसे पहले शर्त यह है कि उस देश का नाम आंतकवादी संगठनों को मदद पहुंचाने के मामले में ग्रे लिस्ट यानी ब्लैक लिस्ट में न हो। अगर ऐसा हुआ तो उसके सामने कई तरह की शर्त रखी जा सकती है। मुमकिन है कि बेलआउट पैकेज देने की व्यवस्था को ही रोक दिया जाए। आईएमएफ के अलावा वर्ल्ड बैंक भी बेलआउट पैकेज जारी करता है। निर्माण क्षेत्र और उद्योग को बढ़ाने के लिए भी बेलआउट पैकेज जारी किए जा सकते हैं। वर्ल्ड बैंक अक्सर देशों के लिए बेलआउट पैकेज जारी करता है।

बेलआउट पैकेज दूसरे देशों की आर्थिक मदद के रूप में भी जारी किया जाता है

आर्थिक संकट से जूझ रहे देश की मदद को जब दूसरे देश आगे आते हैं तो इसके लिए बेलआउट पैकेज जारी किया जाता है। किसी तरह की आपदा के मामले में एक देश दूसरे देश की मदद करता है। अमेरिका में इसके लिए अलग से फंड है। अमेरिका कई मामलों में बेलआउट पैकेज के रूप में दूसरे देशों की मदद करता रहा है। इसी तरह दूसरे विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देश, आर्थिक रूप से कमजोर देशों की मदद करते हैं, जिसे बेलआउट पैकेज का नाम दिया जाता है।

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सऊदी अरब, यूएई, कतर ने दिया बेलआउट पैकेज

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को भी बेलआउट पैकेज के रूप में दूसरे देशों से मदद मिल रही है। कतर ने पिछले साल पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज के रूप में 3 अरब डॉलर की मदद दी है। यूएई ने भी पाकिस्तान को दो अरब डॉलर दिए हैं। सऊदी अरब और चीन ने भी बेलआउट पैकेज के रूप में पाकिस्तान को आर्थिक मदद दी है। इस तरह संकट की घड़ी में एक देश दूसरे देश के साथ खड़ा होता है।  

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Munendra Singh

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