ट्रेजरी बिल क्या है | Treasury Bill Explained in Hindi

ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) क्या होता है

ट्रेजरी बिल का संबंध सरकार के साथ है। सरकार को जब पैसों की जरूरत पड़ती है तो वह ट्रेजरी बिल जारी करती है। ट्रेजरी बिल को छूट मूल्य पर बेचा जाता है। इसे टी-बिल्स भी कहा जाता है। यह पूंजी और मुद्रा बाजार, दोनों में पाया जाता है। इस आर्टिकल में ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसे खरीदने और बेचने से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आप आर्टिकल को आखिरी तक जरूर पढ़ें।

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प्रॉमिसरी नोट क्या है

ट्रेजरी बिल एक तरह का प्रॉमिसरी नोट है। यह भौतिक रूप से जारी किए जाते हैं। कंप्यूटरीकृत प्रणाली के साथ जारी किए जाते हैं। ट्रेजरी बिल में प्रमुख प्रतिभागी व्यक्ति, कंपनियां, बैंक, फर्म, वित्तीय संस्थान आदि शामिल हैं। इसे रियायती मूल्यों पर बेचा जाता है। यह अंकित मूल्य पर परिपक्व होती है। कम अवधि के कारण टी-बल एक तरह से अत्यधिक तरल पदार्थ है।

ट्रेजरी बिल में ब्याज की व्यवस्था नहीं है

ट्रेजरी बिल में ब्याज की व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर ट्रेजरी बिल में इश्यू प्राइस और फेस वैल्यू के बीच के अंतर को ब्याज आय के रूप में देखा जाता है। यह एक तरह से टाइप किया गया उपकरण है, जो पूंजी और मुद्रा बाजार, दोनों में पाया जाता है। ट्रेजरी बिल को परिपक्वता के आधार पर तीन श्रेणियों में हासिल किया जा सकता है। यह आमतौर पर 91, 182 और 364 दिन के लिए जारी किए जाते हैं। ट्रेजरी बिल अल्पकालिक धन जुटाने के लिए एक तरह से अल्पकालिक मुद्रा बाजार है। सरकार को जब भी कम अवधि के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है तो वह ट्रेजरी बिल को जारी करती है।

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ट्रेजरी बिल को वित्तीय साधन भी कहते हैं

ट्रेजरी बिल वित्तीय साधन है। इसे मुद्रा और पूंजी बाजार में उपयोग किया जाता है। यह अतिरिक्त आय और लाभ अर्जित करने के लिए जारी किया जाता है। ट्रेजरी बिल एक तरह से मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट है या निवेश तंत्र है, जो व्यापार, बैंकों और सरकार को बड़ी, लेकिन कम लागत पर कम पूंजी की जरूरत को पूरा करने की अनुमति देता है। इसके जरिए निवेश भी किया जा सकता है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो ट्रेजरी बिल को खरीदते या बेचते हैं। उन्हें इसकी वजह से फायदा भी हो रहा है।

ट्रेजरी बिल की नीलामी किसके द्वारा की जाती है

ट्रेजरी बिल की नीलामी आरबीआई द्वारा की जाती है। 91 दिनों वाले ट्रेजरी बिल का कार्यकाल भी 91 दिन में पूरा होता है। इसे बुधवार को नीलाम किया जाता है। जबकि भुगतान के लिए शुक्रवार के दिन का चयन किया गया है। इसी तरह 182 दिन वाले ट्रेजरी बिल भी इसी अवधि में परिपक्व होते हैं। इसे भी बुधवार को ही नीलाम किया जाता है। वहीं तीसरा और आखिरी बिल 364 दिन का होता है। अवधि पूरी होने के बाद बिल परिपक्व हो जाते हैं। इस बिल को भी बुधवार को नीलाम किया जाता है। जबकि कार्यकाल समाप्त होने के बाद शुक्रवार को बिल का भुगतान किया जाता है।

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Treasury Bill के लिए पात्रता

भारतीय रिजर्व बैंक ने ट्रेजरी बिल को खरीदने के लिए नियम बनाए हैं। वित्तीय संस्थानों को नियमों का पालन करना है। वित्तीय संस्थानों में शामिल, बैंक, कंपनी, प्राथमिक डीलर, फर्म, कारपोरेट निकाय, साझेदार फर्म आदि ट्रेजरी बिल को खरीद सकते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक, राज्य सरकारें, भविष्य निधि, ट्रस्ट, अनुसंधान संगठन के साथ नेपाल राष्ट्र बैंक भी इसके लिए पात्र हैं। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा जारी बिल को खरीद सकता है। यही नहीं, टेजरी बिलों को खरीदने के बाद उन्हें 13, 26 और 52 सप्ताह में जारी किए जाते हैं।

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Munendra Singh

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